इस पोस्ट में हम भारत के राष्ट्रीय उद्यान - Bharat Ke Pramukh Rashtriy Udyan, udhan, Nations Parks of India in Hindi, wildlife senctuary in Hindi, in map, pdf, trick, list को पडेंगे।
भारत के राष्ट्रीय उद्यान टॉपिक आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे- BankSSCRailwayRRBUPSC आदि में सहायक होगा।
आप Bharat Ke Rashtriy Udyan in Hindi का PDF भी डाउनलोड कर सकते है।
Bharat Ke Rashtriy Udyan - भारत के राष्ट्रीय उद्यान

Bharat Ke Rashtriy Udyan - भारत के राष्ट्रीय उद्यान

राष्ट्रीय उद्यान (national park) ऐसा क्षेत्र होता है जिसे किसी राष्ट्र की प्रशासन प्रणाली द्वारा औपचारिक रूप से संरक्षित करा गया हो। 
भारत में 500 से अधिक अभयारण्य हैं, जिन्हें वन्य जीवन अभयारण्य कहा जाता है। 
कई राष्ट्रीय उद्यान पहले वन्य जीवन अभयारण्य ही थे। 
इस लेख में हमने, भारत के शीर्ष 10 सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्यान के नाम, उनके स्थान तथा क्षेत्रफल जैसे तथ्यों पर चर्चा की है।
राष्ट्रीय उद्यान (national park) ऐसा क्षेत्र होता है जिसे किसी राष्ट्र की प्रशासन प्रणाली द्वारा औपचारिक रूप से संरक्षित करा गया हो। 
भारत में 500 से अधिक अभयारण्य हैं, जिन्हें वन्य जीवन अभयारण्य कहा जाता है । 
कई राष्ट्रीय उद्यान पहले वन्य जीवन अभयारण्य ही थे। 
कुछ वन्य जीवन अभयारण्य अपनी कुछ मुख्य प्राणी प्रजातियों के संरक्षण के कारण राष्ट्रीय महत्व रखते हैं। 
येलोस्टोन नेशनल पार्क, विश्व का पहला राष्ट्रीय उद्यान है जिसे 1872 में अमेरिकी राष्ट्रपति उलिसिस एस ग्रांट द्वारा हस्ताक्षरित कानून के माध्यम से स्थापित किया गया था। 
हेली नेशनल पार्क, भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान है जिसका निर्माण 1936 में हुआ था, जिसे अब जिम कोर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के रूप में जाना जाता है।

State Wise List of National Parks of India in Hindi

बिहार के राष्ट्रीय उद्यान

नागी बाँध पक्षी अभयारण्य
नकटी बाँध पक्षी अभयारण्य
वाल्मीकि वन्य जीव अभयारण्य
वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व
कुशेश्वर स्थान पक्षी अभयारण्यय
गौतम बुद्ध वन्य जीव अभयारण्यय
भीमबांध वन्य जीव अभयारण्य
विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन आश्रयणी
उदयपुर वन्य जीव अभयारण्य
पंत वन्य जीव अभयारण्य
बरैला झील पक्षी आश्रयणी
कैमूर वन्य प्राणी आश्रयणी

राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान

केवला देवी राष्ट्रीय उद्यान 
रणथ्मभोर राष्ट्रीय उद्यान
सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान
मरुस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान
मुकिंद्रा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान
घना पक्षी राष्ट्रीय उद्यान
माउंट आबू Wildlife अभ्यारण्य

मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
पेंच राष्ट्रीय उद्यान
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान
सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान
बांधवगढ राष्ट्रीय उद्यान
संजय राष्ट्रीय उद्यान
माधव राष्ट्रीय उद्यान
पालपुर कुनो राष्ट्रीय उद्यान
मण्डला फौसिल राष्ट्रीय उद्यान
रातापानी अभ्यारण्य
राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य
सबसे ज्यादा राष्ट्रीय पार्क मध्यप्रदेश में हैं !

अरुणाचल प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान

नामदफा राष्ट्रीय उद्यान
पखुई अभ्यारण्य

हरियाणा के राष्ट्रीय उद्यान

सुलतानपुर राष्ट्रीय उद्यान
कलेशर राष्ट्रीय उद्यान

उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान

दूधवा राष्ट्रीय उद्यान
चन्द्रप्रभा वन्यजीव विहार

झारखंड के राष्ट्रीय उद्यान

बेतला राष्ट्रीय उद्यान
हजारीबाग अभ्यारण्य
धीमा राष्ट्रीय उद्यान

मणिपुर के राष्ट्रीय उद्यान

केबुल – लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान
सिरोही राष्ट्रीय उद्यान

सिक्किम के राष्ट्रीय उद्यान

कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान
त्रिपुरा के राष्ट्रीय उद्यान
क्लाउडेड लेपर्ड राष्ट्रीय उद्यान

तमिलनाडु के राष्ट्रीय उद्यान

गल्फ आफ मनार राष्ट्रीय उद्यान
इन्दिरा गांधी ( अन्नामलाई ) राष्ट्रीय उद्यान
मुदुमलाई राष्ट्रीय उद्यान
प्लानी हिल्स राष्ट्रीय उद्यान
मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान
गुंडी राष्ट्रीय उद्यान
नेल्लई अभ्यारण्य
प्वाइंट कैलीमर अभ्यारण्य

ओडिसा के राष्ट्रीय उद्यान

भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान
सिंमली पाल राष्ट्रीय उद्यान
नन्दनकानन राष्ट्रीय चिड़ीयाघर
चिल्का झील अभ्यारण्य

मिजोरम के राष्ट्रीय उद्यान

मुरलेन राष्ट्रीय उद्यान
फ़वंगपुई राष्ट्रीय उद्यान
डाम्फा अभ्यारण्य

जम्मू-कश्मीर के राष्ट्रीय उद्यान

दाचीग्राम राष्ट्रीय उद्यान
सलीम अली राष्ट्रीय उद्यान
किस्तवार राष्ट्रीय उद्यान

पश्चिम बंगाल के राष्ट्रीय उद्यान

सुन्दरवन राष्ट्रीय उद्यान
बुक्सा राष्ट्रीय उद्यान
जलदापारा राष्ट्रीय उद्यान
गोरूमारा राष्ट्रीय उद्यान
सिंगलीला राष्ट्रीय उद्यान
नेओरा वैली राष्ट्रीय उद्यान

असम के राष्ट्रीय उद्यान

मानस राष्ट्रीय उद्यान
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
नामेरी राष्ट्रीय उद्यान
राजीव गांधी ओरांग राष्ट्रीय उद्यान
डिब्रूगढ़ साइखोवा राष्ट्रीय उद्यान

आंध्र प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान

इन्दिरा गाँधी प्राणी विज्ञान पार्क
राजीव गांधी ( रामेश्वरम ) राष्ट्रीय उद्यान
पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान
श्री वेंकटेश्वरम राष्ट्रीय उद्यान
नागार्जुन सागर – श्रीशैलम राष्ट्रीय उद्यान
पुलिकट झील अभ्यारण्य

तेलंगाना के राष्ट्रीय उद्यान

कासुब्रह्मानंदा रेड्डी राष्ट्रीय उद्यान
मुग्रावनी राष्ट्रीय उद्यान

महाराष्ट्र के राष्ट्रीय उद्यान

बोरीवली ( संजय गांधी ) राष्ट्रीय उद्यान
चांदोली राष्ट्रीय उद्यान
तदोबा राष्ट्रीय उद्यान
गुगामल राष्ट्रीय उद्यान
नवागांव राष्ट्रीय उद्यान
मेलघाट राष्ट्रिय अभ्यारण्य

अण्डमान-निकोबार के राष्ट्रीय उद्यान

सैडिल पीक राष्ट्रीय उद्यान
महात्मा गाँधी मैरीन राष्ट्रीय उद्यान
कैंपबैल राष्ट्रीय उद्यान
माऊंट हैरियट राष्ट्रीय उद्यान
रानी झांसी मैरीन राष्ट्रीय उद्यान
साउथ बटन राष्ट्रीय उद्यान

हिमाचल प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान

पिन वैली राष्ट्रीय उद्यान
ग्रेट हिमालय राष्ट्रीय उद्यान
रोहल्ला राष्ट्रीय उद्यान
खिरगंगा राष्ट्रीय उद्यानइन्द्रकिला राष्ट्रीय उद्यान
शिकरी देवी अभ्यारण्य

गुजरात के राष्ट्रीय उद्यान

गिर राष्ट्रीय उद्यान
मैरीन ( कच्छ की खाडी ) राष्ट्रीय उद्यान
ब्लेकबक राष्ट्रीय उद्यान
वंसदा राष्ट्रीय उद्यान
जंगली गधा अभ्यारण

उत्तराखण्ड के राष्ट्रीय उद्यान

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान
फ़ूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान
नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान
राजाजी राष्ट्रीय उद्या


मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान, जैसलमेर

मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान राज्य के जैसलमेर शहर के थार मरुस्थल में स्थित है।

यह थार रेगिस्तान और उसके समृद्घ वन्य पशुओं के पारिस्थितिक तंत्र का एक उदाहरण है।

उद्यान का अधिकांश भाग नमक की झीलों की तलहटी और कंटीली झाड़ियों से पूर्ण है।

मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान की अधिकतर भूमि बंजर है।

डायनासोर के 60 लाख वर्ष पुराने जीवाश्म भी यहीं पाये गए थे।

मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवों को देखने के लिये 'सुदश्री जंगल पोस्ट' सबसे अच्छी जगह है।

राजस्थान में क्षेत्रफल की दृष्टि से यह सबसे बड़ा वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र है।

उद्यान का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा रेत के टीलों से घिरा हुआ है, जिसमें पत्थर, पेवमेंट व छोटे-छोटे नमक के तालाब और स्थायी रेत के टीले शामिल हैं।

3000 वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान मरुभूमि की वनस्पति, रेतीले भू-भाग और वन्य जीव के लिए विख्यात है।

जैसलमेर ज़िले में 1900 वर्ग कि.मी. तथा बाड़मेर ज़िले में 1262 वर्ग कि.मी., यह क्षेत्रफल इन दोनों ज़िलों के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 4.33 प्रतिशत, राजस्थान प्रदेश की मरुभूमि का 2.1 प्रतिशत तथा भारतवर्ष के थार मरुस्थल का 1.6 प्रतिशत है।

इस क्षेत्र में पाई जाने वाली वनस्पतियाँ एवं प्राणी बहुमूल्य धरोहर हैं। यह बड़ी छिपकलियों की विशिष्ट प्रजातियों, बिच्छुओं एवं साँपों आदि के लिए प्रसिद्ध है।

अनूठी वनस्पतियों और पशुओं की विभिन्न प्रजातियाँ यहाँ पर पाई जाती हैं।

यहाँ पर वनस्पतियों और पशुओं को देखने का सबसे उत्तम स्थान 'सुदाश्री वन चौकी' है।

इस राष्ट्रीय उद्यान में राजबाग़ झील, मलिक तलाब झील और पदम तलाब झील प्रमुख हैं।


गिर वन राष्ट्रीय उद्यान, गुजरात

गिर वन राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य, गुजरात राज्य, पश्चिम- मध्य भारत में स्थित है।

गिर वन राष्ट्रीय उद्यान 'बाघ संरक्षित क्षेत्र' है, जो 'एशियाई बब्बर शेर' के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

जूनागढ़ नगर से 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में शुष्क झाड़ीदार पर्वतीय क्षेत्र में स्थित इस उद्यान का क्षेत्रफल लगभग 1,295 वर्ग किलोमीटर है।

यहाँ की वनस्पति में सागौन, साल और ढाक (ब्यूटिया फ्रोंडोसा) जैसे पर्णपाती वृक्षों सहित कांटेदार जंगल शामिल हैं।

गिर वन संरक्षित क्षेत्र की स्थापना 1913 में एशियाई सिंहों के बचे हुए सबसे बड़े समूह को संरक्षण प्रदान करने के लिए की गई थी।

इसे 1965 में अभयारण्य का दर्जा प्रदान कर दिया गया था।

स्थापना के बाद से यहाँ सैकड़ों एशियाई सिंहों का जन्म हो चुका है।

यहाँ आगंतुकों को सुरक्षित गाड़ियों में निर्देशित यात्रा के ज़रिये सिंह दिखाए जाते हैं।

यहाँ के अन्य प्राणियों में तेंदुआ, जंगली सूअर, चित्तीदार हिरन, नीलगाय, चौसिंगा हिरन और चिंकारा शामिल हैं।

इस क्षेत्र के मध्य में स्थित विशाल जलाशय में कुछ मगरमच्छ भी हैं।

गिर वन राष्ट्रीय उद्यान में तुलसी-श्याम झरने के पास भगवान कृष्ण का एक छोटा सा मंदिर भी है


कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है। यह मुख्यत: एक बाघ अभयारण्य है, जो 2051.74 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।

इस अभयारण्य का मूल्यांकन एशिया के सबसे अच्छे उद्यान के रूप में होता । 'कान्हा अभयारण्य' में घास के मैदान, साल के पेड़ और बांस के जंगल, वन्यजीवन के लिए मानो स्वर्ग हैं।

इस राष्ट्रीय उद्यान में बाघ का मुक्त संचार है, जो अभयारण्य के उद्देश्य को सफल साबित करता है।

इस अभयारण्य में दुर्लभ बारहसिंगा भी पाया जाता है, जो सम्पूर्ण विश्व में और कहीं नहीं मिलता।

वन्य जीवों के साथ-साथ इस अभयारण्य में पक्षियों की 300 से भी अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।


जीजामाता उद्यान, महाराष्ट्र

जीजामाता उद्यान महाराष्ट्र राज्य के मुंबई शहर में स्थित चिड़ियाघर और बग़ीचा है।

जीजामाता उद्यान में वनस्पतिक और प्राणी विज्ञान से सम्बन्धित बग़ीचा हैं।

मुंबई के चिड़ियाघर विक्टोरिया गार्डन का नाम अब जीजामाता उद्यान हो गया हैं।

जीजामाता उद्यान में रोचक वनस्पतियों और जीवों का संग्रह है।

जीजामाता उद्यान के अतिरिक्त स्थित संग्रहालय की इमारत ग्रेको-रोमन शैली में बनाई गई है।

जीजामाता उद्यान के प्रवेश द्वार पर बहुत अधिक संख्या में पत्थर से बने हाथी भी है। जो बहुत ही ख़ूबसूरत है।


ताड़ोबा राष्ट्रीय उद्यान, महाराष्ट्र

ताड़ोबा अथवा 'तरोबा राष्ट्रीय उद्यान' महाराष्ट्र के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। यह चन्द्रपुर शहर में स्थित है।

यह राष्ट्रीय उद्यान चन्द्रपुर से 45 कि.मी. की दूरी पर है।

टीस और बाँस के पेड़ इस उद्यान की सुंदरता में वृद्धि करते हैं।

'कान्हा राष्ट्रीय उद्यान' से दक्षिण-पश्चिम में स्थित इस राष्ट्रीय उद्यान को बाघ, तेंदुए, सांभर हिरन, वाइल्ड बोर, भेड़िए, गोर, चीतल, नीलगाय, दलदली मगरमच्छ और अनेक जल पक्षियों का घर माना जाता है।

नवंबर से जून का महीना यहाँ आने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।

यहाँ उद्यान में ठहरने के लिए रेस्ट हाउस की उचित व्यवस्था है।


पोरबंदर पक्षी अभयारण्य गुजरात

पोरबंदर पक्षी अभयारण्य गुजरात राज्य के पोरबंदर के बीचों बीच स्थित है।

यह अभयारण्य 9 एकड़ में फैला है।

पोरबंदर पक्षी अभयारण्य गुजरात का सबसे छोटा पक्षी अभयारण्य है।

इस पक्षी अभयारण्य पर न केवल ताजे पानी की झील है बल्कि यह अभयारण्य कई निवासी और प्रवासी पक्षियों का घर भी है।

पोरबंदर पक्षी अभयारण्य पर आपको मुर्ग़े-मुर्ग़ियाँ, फ्लेमिंगो, सारस, बत्तख़ सबसे विभिन्न प्रकार के पक्षी देखने को मिल जाएंगे।


माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य, राजस्थान

माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान राज्य के पश्चिमी ज़िले सिरोही के माउण्ट आबू की पर्वतमालाओं के बीच स्थित है। यह बहुत ही सुन्दर और दर्शनीय स्थल है, जो कि 112 वर्ग कि.मी. में फैला हुआ है।

अभयारण्य माउण्ट आबू का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।

यह प्रसिद्ध अभयारण्य आबू रोड से बीस किलोमीटर की दूरी पर है।

इस अभयारण्य में मुख्य रूप से तेंदुए, स्लोथबियर, मोर, सांभर, चिंकारा, जंगली सूअर, नीलगाय, खरगोश, जंगली मुर्गा, तीतर और लंगूर आदि पाए जाते हैं।

288 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य की स्थापना सन 1960 में की गई थी।

यहाँ पक्षियों की लगभग 250 और पौधों की 110 से भी ज़्यादा प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं।

पक्षियों में रुचि रखने वालों के लिए यह अभयारण्य एक आदर्श जगह है।


गाँधी सागर अभयारण्य मध्य प्रदेश

गाँधी सागर अभयारण्य मध्य प्रदेश के नीमच और मंदसौर ज़िले की उत्तरी सीमा पर स्थित है।

यह अभ्यारण्य प्राकृतिक सुंदरता को देखने और खोक करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्थान है।

गाँधी सागर अभयारण्य वर्ष 1974 में अधिसूचित किया गया था। इसके बाद 1983 में भारत सरकार ने इसमें और क्षेत्र सम्मिलित कर दिया।

यह अभयारण्य कुल 368.62 वर्ग किलोमीटर से भी अधिक के क्षेत्रफल में विस्तृत है।

पर्यटक इस अभयारण्य में आकर कुछ समय शांतिपूर्वक व्यतीत कर सकते हैं।

अभयारण्य राजस्थान से लगा हुआ है। चंबल नदी सोने पर सुहागे का काम करती है, जो अभयारण्य के मध्य में से गुजरती है और इसे दो हिस्सों में विभाजित करती है।

इस प्रकार यह नदी इस अभयारण्य को पश्चिमी एवं पूर्वी दो भागों में बांटती है, जिसमें से पश्चिमी भाग नीमच ज़िले में और पूर्वी भाग मंदसौर ज़िले में स्थित है।

गाँधी सागर अभयारण्य आने वाले पर्यटकों के लिए निश्चित रूप से यहाँ देखने को बहुत कुछ है।


शेरगढ़ अभयारण्य, राजस्थान

शेरगढ़ अभयारण्य बाराँ ज़िला, राजस्थान में स्थित है। ज़िले का शेरगढ़ वन सर्वाधिक बाघों के लिए विख्यात है। सन 1983 में इसको 'शेरगढ़ अभयारण' का नाम देकर संरक्षित किया गया था।

यह अभयारण्य मात्र 99 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें वन तथा वन्य जीवों को सुरक्षा प्रदान की जाती है।

आजकल बाघ तो जंगल से लुप्त हो गये हैं, परंतु अब भी बघेरा, रीछ, लकड़बग्घा, चीतल, सांभर तथा अजगर आदि जीव यहाँ देखे जा सकते हैं।


राजाजी राष्ट्रीय उद्यान

उत्तराखंड के देहरादून से 23 किमी की दूरी पर स्थित है।

यह देहरादून के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से है।

पहले इस क्षेत्र में फैले जंगलों में तीन अभयारण्य थे-

  1. राजाजी
  2. मोतीचूर
  3. चिल्ला

1983 में इन तीनों को मिलाकर एक कर दिया गया।

महान स्वतंत्रता सेनानी चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के नाम पर इसका नाम राजाजी राष्ट्रीय उद्यान रखा गया।

830 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला राजाजी राष्ट्रीय उद्यान अपने यहाँ पाए जाने वाले हाथियों की संख्या के लिए जाना जाता है।

इसके अलावा राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में हिरन, चीते, सांभर और मोर भी पाए जाते हैं।

राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में पक्षियों की 315 प्रजातियाँ पाई जाती हैं


कैला देवी वन्यजीव अभयारण्य करौली

कैला देवी वन्यजीव अभयारण्य करौली में स्थित है, जो राजस्थान-मध्य प्रदेश सीमा से लगा हुआ है। इस अभ्यारण्य में विभिन्न प्रकार के वन्य जीवों को आसानी से देखा जा सकता है।

ये वन्य जीव अभ्यारण 676.40 वर्ग कि.मी. के एक क्षेत्र में फैला हुआ है।

अभयारण्य के पश्चिमी किनारे पर बनास नदी बहती है, जबकि दक्षिण-पूर्व दिशा में चम्बल नदी का प्रवाह है।

'कैला देवी वन्यजीव अभयारण्य', जो 'कैला देवी मंदिर' के नाम पर है, दर्शकों को प्रकृति के लिए एक सुंदर परिदृश्य प्रस्तुत करता है।

इस अभयारण्य में चिंकारा, जंगली सुअरों और सियार के अलावा बाघ, तेंदुओं, स्लॉथ भालू, हाइना, भेड़ियों और साम्भर को आसानी से विचरण करते हुए देखा जा सकता है।[


संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के शहर मुंबई में कई पर्यटन स्थल है जिनमें से एक संजय गांधी नेशनल पार्क है।

संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान को बोरीवली नेशनल पार्क और संजय गांधी नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता था जो मुम्‍बई में बोरीवली उप नगर के आस पास स्थित है।

संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान 1974 में अधिसूचित किया गया।

संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान सामान्‍य दर्शनीय स्‍थलों के कारण बड़े शहर का एक आकर्षण बन गया।

संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान आने वालों को कई प्रकार के जीव जंतु दिखाई दे सकते हैं जिसमें चित्तीदार हिरण, ब्‍लैक नेप्‍ड हेयर, बार्किंग डीयर, साही, पाम सिवेट, माउस डीयर, रिसस मेकाक, बोनेट मेकाक, हनुमान लंगूर, पढ़ने वाली भारतीय लोमड़ी और सांभर शामिल है।

संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान लगभग 38 सरीसृप प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

पर्यटकों को तुलसी झील में घडियाल और पाइथन देखने को मिल सकते हैं।

संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान कोबरा, रसेल वाइपर, बैम्‍बू पिट वाइपर और सिलोनी कैट साँप भी देखे जा सकते हैं।


सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान

राजस्थान के अलवर ज़िले में अरावली की पहाड़ियों पर 800 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला सरिस्का मुख्य रूप से वन्य जीव अभयारण्य और टाइगर रिजर्व के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा इस स्थान का ऐतिहासिक महत्त्व भी है।

यह दिल्ली से लगभग 200 किमी और जयपुर से 107 किमी की दूरी पर स्थित है।

सरिस्का में बने मंदिरों के अवशेषों में गौरवशाली अतीत की झलक दिखती है।

ईसापूर्व 5वीं शताब्दी के धर्मग्रन्थों में इस स्थान का उल्लेख मिलता है।

कहा जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान सरिस्का में आश्रय लिया था।

मध्यकाल में औरंगज़ेब ने अपने भाई को कैद करने के लिए कंकावड़ी क़िले का प्रयोग किया था।

8वीं से 12वीं शताब्दी के दौरान यहाँ के अमीरों ने अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया।

20वीं शताब्दी में महाराजा जयसिंह ने सरिस्का को संरक्षित क्षेत्र बनाने के लिए अभियान चलाया।

आज़ादी के बाद 1958 में भारत सरकार ने इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया और 1979 में इसे प्रोजेक्ट टाईगर के अधीन लाया गया।

पहाड़ों और जंगलों से घिरा यह अभयारण स्तनधारी जानवरों, पक्षियों, सापों, बाघों और तेंदुओं के लिए ख़ास पहचान रखता है।

सरिस्का वन्यजीव अभयारण में पूरे साल सैलानियों की भीड़ लगी रहती है।

यहाँ पर जाने का सबसे अधिक अच्छा समय जून से अक्तूबर तक का है।

इस दौरान यहाँ पर जंगल के राजा को उसके परिवार के साथ घूमते हुए बड़ी आसानी से देखा जा सकता है।


जिम कोर्बेट राष्ट्रीय पार्क

जिम कोर्बेट राष्ट्रीय पार्क दिल्ली से 240 कि.मी. उत्तर-पूर्व में स्थित एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है। यह राष्ट्रीय अभयारण्य उत्तरांचल राज्य के नैनीताल ज़िले में रामनगर शहर के निकट एक विशाल क्षेत्र को घेर कर बनाया गया है।

यह गढ़वाल और कुमाऊँ के बीच रामगंगा नदी के किनारे लगभग 1316 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।

इस पार्क का मुख्य कार्यालय रामनगर में है और यहाँ से परमिट लेकर पर्यटक इस उद्यान में प्रवेश करते हैं।

जब पर्यटक पूर्वी द्वार से उद्यान में प्रवेश करते हैं तो छोटे-छोटे नदी-नाले, शाल के छायादार वृक्ष और फूल-पौधों की एक अनजानी सी सुगन्ध उनका मन मोह लेती है।

पर्यटक इस प्राकृतिक सुन्दरता में सम्मोहित सा महसूस करता है।


तालछापर कृष्ण मृग अभयारण्य राजस्थान

तालछापर कृष्ण मृग अभयारण्य राजस्थान राज्य के उत्तरी चुरू ज़िले में स्थित है।

यह अभयारण्य चुरू ज़िले के सुजानगढ़ कस्बे से बारह किलोमीटर की दूरी पर बीकानेर-जयपुर राजमार्ग पर स्थित है।

अभयारण्य 820 हैक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है।

इस अभयारण्य में सिर्फ़ काले हिरण ही मिलते हैं, जिनको पाँच सौ तक के झुण्ड में देखा जा सकता है।


पेरियार राष्ट्रीय उद्यान दक्षिण, केरल

पेरियार राष्ट्रीय उद्यान दक्षिण भारत के केरल राज्य में स्थित है। यह राष्ट्रीय उद्यान एक बाघ संराक्षित क्षेत्र है।

यह उद्यान सन 1040 से पेरियार नदी के परिक्षेत्र में स्थित है। पेरियार उद्यान को वर्ष 1998 से 'हाथी संरक्षण परियोजना' के अंतर्गत भी लाया गया है।

यहाँ नदी के गहरे जल में हाथी तैरने का अभ्यास भी करते हैं। नील गाय, साम्भर, भालू, चीता तथा तेन्दुआ आदि जंगली जानवर भी यहाँ पाए जाते हैं।

'पेरियार राष्ट्रीय उद्यान' दक्षिण भारत में वन्य जीवन की विविधता का बड़ा गढ़ है।

इसकी स्थापना सन 1950 में की गई थी, जबकि 'टाइगर रिजर्व' वर्ष 1978 से शुरू किया गया था।

"प्रभु की धरती" कहे जाने वाले केरल के पश्चिमी तटों के मैदानी इलाकों में 'पेरियार राष्ट्रीय उद्यान' और 'टाइगर रिजर्व' स्थित है।

पेरियार उद्यान के बीचों-बीच मन को आकर्षित करने वाली और एक विलक्षण नयनाभिराम दृश्य उत्पन्न करने वाली झील भी है, जो सन 1895 में पेरियार नदी पर बाँध बनाकर निकाली गई थी।

वैसे तो यह टाइगर रिजर्व है, लेकिन पर्यटक यहाँ झील में हाथियों की जलक्रीड़ा देखने भी आते हैं।


शांता घाटी राष्ट्रीय उद्यान भारत के केरल

शांता घाटी राष्ट्रीय उद्यान भारत के केरल राज्य में स्थित है।

यह देश का एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान है।

यह उद्यान वन्यजीवों की सम्पन्नता में काफ़ी धनी है।

इस राष्ट्रीय उद्यान में हाथी, जंगली सुअर, लघुपुच्छ वानर, साम्भर आदि वन्यजीव पाए जाते हैं।

यह उद्यान पर्यावरण तथा शोध का प्रमुख विषय रहा है।


फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान, उत्तराखण्ड

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान भारत के उत्तराखण्ड राज्य में स्थित प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है।

इस उद्यान को आमतौर पर सिर्फ़ 'फूलों की घाटी' के नाम से सम्बोधित किया जाता है।

फूलों की घाटी उद्यान 87.50 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ है।

फूलों की घाटी को सन् 1982 ई. में राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया था।

नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और 'फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान' सम्मिलित रूप से विश्व धरोहर स्थल घोषित किये गए हैं।

फूलों की घाटी उद्यान चमोली ज़िले के अंतिम बस अड्डे से 275 किमी. की दूरी पर है।

यहाँ से प्रवेश स्थल की दूरी 13 किमी. है।

उद्यान में आने वाले पर्यटक 3 किमी. लम्बी तथा आधा किमी. चौड़ी फूलों की घाटी में घूम सकते हैं।



नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान, उत्तराखण्ड

नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखण्ड के नंदा देवी के शिखर पर स्थित राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य है।

यह पार्क 1982 में राष्ट्रीय उद्यान बना।

इस क्षेत्र के अंतर्गत फूलों की घाटी है, जहाँ किस्म-किस्म के फूलों की छटा बिखरी हुई है।

नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और 'फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान' सम्मिलित रूप से विश्व धरोहर स्थल घोषित किये गए हैं।



रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, राजस्थान

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के सवाईमाधोपुर ज़िले में स्थित है।

यह उत्तर भारत के बड़े राष्ट्रीय उद्यानों में गिना जाता है। 392 वर्ग किलोमीटर में फैले इस उद्यान में अधिक संख्या में बरगद के पेड़ दिखाई देते हैं।

यह उद्यान बाघ संरक्षित क्षेत्र है। यह राष्ट्रीय अभयारण्य अपनी खूबसूरती, विशाल परिक्षेत्र और बाघों की मौजूदगी के कारण विश्व प्रसिद्ध है।

अभयारण्य के साथ-साथ यहाँ का ऐतिहासिक दुर्ग भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

लंबे समय से यह राष्ट्रीय उद्यान और इसके नजदीक स्थित रणथंभौर दुर्ग पर्यटकों को विशेष रूप से प्रभावित करता है।


भितरकनिका अभयारण्य, उड़ीसा

भितरकनिका अभयारण्य भारत के उड़ीसा राज्य में स्थित राष्ट्रीय उद्यान है।

भितरकनिका अभयारण्य राज्य के तटीय भागों में फैला हुआ है।

देश के प्रमुख अभयारण्यों में से यह एक है।

भितरकनिका अभयारण्य में बड़ी मात्रा में 'ओलाइव रिडले कछुए' अण्डे देने के लिए आते हैं।

भितरकनिका अभयारण्य में खारे पानी के मगरमच्छों की अधिकता है।

यहाँ सफ़ेद मगरमच्छ, भारतीय अजगर तथा कालेपक्षी भी पाये जाते हैं।

________________

tags: bharat ke pramukh Rashtriy Udyan, notes, map, pdf, trick, list, national parks of India.

Start The Quiz

Note:- sscwill.in वेबसाइट में उपयोग किए गए मैप वास्तविक मैप से अलग हो सकते हैं। मैप्स को विद्यार्थियों की सुविधा के लिए सरल बनाया गया है।
स्टीक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें.....🙏🙏🙏