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भारत के  प्रमुख बांध

बाँध एक अवरोध होता है, जो पानी को बहने से रोकता है और एक जलाशय बनाने में मदद करता है। 
इससे बाढ़ आने से तो रुकती ही है, जमा किये गया जल सिंचाई, जलविद्युत, पेय जल की आपूर्ति, नौवहन आदि में भी सहायक होती है।

बांध के प्रकार

आवश्यकता के अनुसार बांध कई प्रकार के होते हैं, जैसे:-
  • अर्क बांध
  • ग्रेविटी बांध
  • अर्क-ग्रेविटी बांध
  • बर्रगेस बांध
  • तटबन्ध बांध
  • रॉक फिल
  • कंक्रीट फेस रॉक फिल बांध
  • धरती भरने के बांध

बांध के लाभ/फायदे

उचित रूप से अभिकल्पित तथा सुनिर्मित किए गए बांध लोगों की पेयजल की आवश्‍यकताओं और औद्योगिक आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने में जलाशयों में संचित जल का अत्‍य अधिक प्रयोग किया जाता है।
बांध और जलाशयों एक निर्माण से वर्षा ऋतु के दौरान अतिरिक्‍त जल का उपयोग शुष्‍क भूमि पर सिंचाई हेतु किया जा सकता है।
इस प्रकार की योजनाएं बाढ़ जैसे भयानक खतरे को रोकने में सहायक है।
बांध में एकत्रित पानी से विद्युत का उत्पादन होता है।  
ऊर्जा देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। 
जल विद्युत ऊर्जा का सस्‍ता, स्‍वच्‍छ और नवीनीकरणीय स्‍त्रोत है।
बांध के निर्माण से आसपास का स्थान एक झील की तरह सुन्‍दर प्रस्‍तुत करता है,जो एक मनोरंजन का स्‍त्रोत बन जाता हैं। 
इसके अलावा लोग झील से नौकायन, तैराकी, मत्‍स्‍य पालन इत्‍यादि का भी लाभ उठा सकते हैं।

बांध से होने वाले नुकसान/हानियाँ

नदी पर बांध बनने से नदी के जल का प्रवाह बाधित होता है।
बाँध से नदी की शाखाएँ बट जाती है, जो जल में रहने वाले वनस्पति को स्थानांतरित करता है।
बाढ़ निर्मित मैदान में बने जल भंडारों में वनस्पति डूब जाती है तथा मृदा विघटित हो जाती है।
बहुउद्देशीय परियोजनाएं तथा बड़े बांध नर्मदा बचाओ आंदोलन और टिहरी बांध आंदोलन के जन्मदाता बन गये है क्योंकि लोगो को इनके कारण अपने घरो से पलायन करना पड़ा।
बांधों के कारण पानी रुकने से मछलियों की कई प्रजाति समाप्त हो जाती है जिससे जलीय जैव विविधता को नुकसान होता है।
बांधो के जलाशयों में रुके पानी में मलेरिया की कीटाणु पनपते हैं. जो जलाशयों के नजदीकी क्षेत्र में रह रहे लोगों की बीमारियाँ बढ़ाते हैं।
बाँध के जलाशयों में पत्ते, टहनियां और जानवरों की लाशें नीचे जमती हैं और सड़ने लगती है। 
तालाब के नीचे इन्हें ऑक्सीजन नहीं मिलती है जिस कारण मीथेन गैस बनती है जो कार्बन डाई ऑक्साइड से ज्यादा ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाती है।

Bharat Ke Pramukh Bandh

भारत के प्रमुख बांधो की सूची 

बांध
नदी
राज्य
सरदार सरोवर बांध
नर्मदा नदी
वडोदरा,गुजरात
टेहरी बांध
भागीरथी नदी
प्रतापनगर, उत्तराखंड
लखवार 
बांधयमुना नदी
देहरादून, उत्तराखंड
इडुक्की (एब)/इडुक्की आर्च 
पेरियार नदी
बांधतोडुपुलै, केरल
भाखडा बांध
सतलुज नदी
बिलासपुर, हिमाचल प्र.
पकाल दुल बांध
मरुसूदर नदी
किश्तवाड़, जम्मू कश्मीर
धारोई बांध
साबरमती नदी
मेहसाणा, गुजरात
हीराकुंड बांध
महानदी
संबलपुर, ओडिशा
कर्जन बांध
कर्जन नदी
राजपीपला, गुजरात
सुपा बांध
काली नदी
सुपा, कर्नाटक
इदमलयर (एब) बांध
इदमलयर नदी
देवीकोलम, केरल
कोयना बांध
कोयना नदी
पतन, महाराष्ट्र
शोलयर बांध
शोलयर नदी
पोलाची, तमिलनाडु
लख्या बांध
लख्याहोल नदी
मुदिगेरे, कर्नाटक
सलाल  बांध
चेनाब नदी
गुलाब गढ़, J&K
सरदार सरोवर गुजरात बांध
नर्मदा नदी
राजपीपल, गुजरात
श्रीसैलम बांध
कृष्णा नदी
नन्दीकोटकुर, आंध्र प्रदेश
रंजीत सागर बांध
रावि नदी
पठानकोट, पंजाब
बगलिहार बांध
चेनाब नदी
रामबाण, जम्मू कश्मीर
चेमेराई बांध
रावि नदी
भटियात, हिमाचल प्रदेश
चेरुठोणी बांध
चेरुठोणी नदी
तोडुपुलै, केरला
पांग बांध
बीस नदी
गोपीपुर, हिमाचल प्रदेश
जमरनी बांध
गोला नदी
नैनीताल, उत्तराखंड
सुबनसिरी लोअर बांधसुबनसिरी
सुबनसिरी नदी
अरुणाचल प्रदेश
रामगंगा बांध
रामगंगा नदी
लैंसडौन, उत्तराखंड
नागार्जुन सागर बांध
कृष्णा नदी
गुरुजला, आंध्र प्रदेश
कक्की (एब) बांध
कक्की नदी
रानी, केरल
नगी बांध
नगी नदी
जमुई, बिहार

Bharat Ke Pramukh Bandh
Bharat Ke Pramukh Bandh

भारत के प्रमुख बांधों का संक्षेप में वर्णन 

सरदार सरोवर बांध

सरदार सरोवर बांध गुजरात के नवगाम के पास नर्मदा नदी पर बना एक गुरुत्व बांध है। 
यह बांध चार राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में पानी तथा बिजली की आपूर्ति करते है।
सरदार सरोवर भारत का दूसरा सबसे बड़ा बांध है। 
यह नर्मदा नदी पर बना 138 मीटर ऊँचा (नींव सहित 163 मीटर) है। 
नर्मदा नदी पर बनने वाले 30 बांधों में सरदार सरोवर और महेश्वर दो सबसे बड़ी बांध परियोजनाएं हैं और इनका लगातार विरोध होता रहा है।

यह सरदार वल्लभ भाई पटेल की महत्त्वाकांक्षी परियोजना थी जिसकी संकल्पना को वर्ष 1960 के आसपास जवाहरलाल नेहरू द्वारा मूर्त रूप देने का प्रयास किया, लेकिन इस परियोजना हेतु कोई ठोस कदम नही उठाया जा सका।

वर्ष 1980 के आसपास विश्व बैंक की सहायता से इस परियोजना पर ज़मीनी कार्यवाही प्रारंभ की गई।
नर्मदा नदी दक्षिण-पश्चिम मालवा पठार के बाद एक लंबे गार्ज का निर्माण करती है। 
इस गार्ज का विस्तार गुजरात तक है जहाँ सरदार सरोवर बांध का निर्माण किया गया है।
बांध के लिये भूमि अधिग्रहण के बाद लोगों के विस्थापन की चिंता को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की भी शुरुआत हुई।

सरदार सरोवर बांध का महत्त्व

बांध से निकली गई नर्मदा नहर के माध्यम से गुजरात के सूखा प्रभावित क्षेत्रों को सिंचाई और पेयजल हेतु पानी की की आपूर्ति की जाती है।
राजस्थान के बाड़मेर और जालौर के शुष्क क्षेत्रों में भी सिंचाई और पेयजल के लिये नर्मदा नहर से पानी की आपूर्ति की जाती है।
इस बांध के निर्माण से भरूच आदि ज़िलों में बाढ़ की स्थिति में भी सुधार हुआ है।
गुजरात सरकार ने नहर के ऊपर सौर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा उत्पन्न करने की योजना की घोषणा की है।

टिहरी बांध

टिहरी बाँध की ऊँचाई 261 मीटर है जो इसे विश्व का पाँचवा सबसे ऊँचा बाँध बनाती है।
टिहरी बाँध भारत का सबसे ऊँचा तथा विशालकाय बाँध है। 
यह भागीरथी नदी पर 260.5 मीटर की उँचाई पर बना है। 
टिहरी बांध दुनिया का आठवाँ सबसे बड़ा बाँध है, जिसका उपयोग सिंचाई तथा बिजली पैदा करने हेतु किया जाता है।
टिहरी बाँध टेहरी विकास परियोजना का एक प्राथमिक बाँध है जो उत्तराखण्ड राज्य के टिहरी जिले में स्थित है। 
इसे स्वामी रामतीर्थ सागर बांध भी कहते हैं। 
यह बाँध हिमालय की दो महत्वपूर्ण नदियों पर बना है जिनमें से एकगंगा नदी की प्रमुख सहयोगी नदी भागीरथी तथा दूसरी भीलांगना नदी है, जिनके संगम पर इसे बनाया गया है।

    " टिहरी बाँध और जल विद्युत इकाई - 1000 मेगावाट
     कोटेशवर जल विद्युत परियोजना - 400 मेगावाट
     टिहरी पम्प स्टोरेज परियोजना - 1000 मेगावाट  "


वर्तमान में इसकी स्थापित क्षमता 2400 मेगावाट है।

'भारत सरकार' ने यहाँ अतिरिक्त 1000 मेगावाट की इकाई लगाने की मंज़ूरी दे दी है।
टिहरी बाँध परियोजना पर केंद्र सरकार ने 75 प्रतिशत व राज्य सरकार ने 25 प्रतिशत धन व्यय किया है।
यह परियोजना हिमालय के केंद्रीय क्षेत्र में स्थित है। 
यहाँ आस-पास 6.8 से 8.5 तीव्रता के भूकंप आने का अनुमान लगाया गया है। 
इस कारण इस बाँध का भारी विरोध भी हो रहा है।
पर्यावरणविद मानते है की बाँध के टूटने के कारण ऋषिकेश, हरिद्वार, बिजनौर, मेरठ और बुलंदशहर इसमें जलमग्न हो जाएँगे।

लखवार बांध

लखवार बांध यमुना नदी पर स्थित है जो उत्तराखंड के देहरादून जिले के लोहारी गांव में है। 
यह 192 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध है। 
यह 165.9 मीटर लंबा है। यह 20 से 50 किमी लंबे जलाशय पर स्थित है। 
इसका उद्देश्य बिजली उत्पादन करना और लोगों को पीने का पानी देना है। 
इसकी कुल लागत 3966 करोड़ रुपये है। 
इसकी क्षमता 300 मेगावॉट उत्पादन की है और इसके जलाशय में 334.04 मिलियन क्यूबिक पानी है। 

इदुक्की बांध

यह 167.68 मीटर (550.1 फीट) की ऊँचाई के साथ एशिया के सबसे ऊँचे चाप बांधों में से एक है। 
इसे केरल राज्य विद्युत् निगम द्वारा निर्मित किया गया है तथा यही इसके पास ही बांध का स्वामित्व भी है।
यह बांध मूलामट्टमं में बने 780 मेगावॉट के जलविद्युत ऊर्जा स्टेशन से जुड़ा है, जहाँ विद्युत् उत्पादन का प्रारम्भ 4 अक्टूबर 1975 को हुआ था।
यह बांध कंक्रीट, द्वि वक्रिय परवालयाकार, पतला चाप प्रकार का है।

भाखड़ा बांध 

यह बाँध पंजाब राज्य के होशियारपुर ज़िले में सतलुज नदी पर बनाया गया है। 
यह बाँध 261 मीटर ऊँचे टिहरी बाँध के बाद भारत का दूसरा सबसे ऊँचा बाँध है। 
इसकी उँचाई 255.55 मीटर (740 फीट) है। अमेरिका का 'हुवर बाँध' 743 फीट ऊँचा है।
इसकी सहायक 'इंदिरा सागर परियोजना' के अंतर्गत राजस्थान तक इंदिरा नहर का विकास किया गया है, जो भारत की सबसे बड़ी नहर प्रणाली है। 
इसका मुख्य उद्देश्य सिंचाई एवं विद्युत उत्पादन है।
इस परियोजना से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर, झुंझुनू एवं चुरू ज़िलो को विद्युत प्राप्त होती है।

पाकाल डैम

पाकाल डैम जम्मू और कश्मीर के भारतीय केंद्र शासित प्रदेश के किश्तवाड़ जिले में, चिनाब नदी की एक सहायक नदी मरूसदार नदी पर निर्माणाधीन कंक्रीट-फेस रॉक-फिल बांध है। 
बांध का प्राथमिक उद्देश्य पनबिजली उत्पादन है। 
यह चेनाब पर दुल हस्ती बांध के जलाशय पर एक 10 किमी (6.2 मील) लंबी हेडलाइन सुरंग और पावर स्टेशन के माध्यम से दक्षिण में पानी को मोड़ देगा।
फरवरी 2014 में, परियोजना को घरेलू और विदेशी देशों के एक संघ को प्रदान किया गया था। 

सरदार सरोवर

सरदार सरोवर भारत का दूसरा सबसे बड़ा बांध है। 
यह नर्मदा नदी पर बना 138 मीटर ऊँचा (नींव सहित 163 मीटर) है। 
नर्मदा नदी पर बनने वाले 30 बांधों में सरदार सरोवर और महेश्वर दो सबसे बड़ी बांध परियोजनाएं हैं और इनका लगातार विरोध होता रहा है। 
इन परियोजनाओं का उद्देश्य गुजरात के सूखाग्रस्त इलाक़ों में पानी पहुंचाना और मध्य प्रदेश के लिए बिजली पैदा करना है लेकिन ये परियोजनाएं अपनी अनुमानित लागत से काफ़ी ऊपर चली गई हैं।

श्रीसैलम बाँध

   " राज्य      - आंध्र प्रदेश
    ज़िला      - कुरनूल
   निर्माण   - 1960 से1981
   नदी       - कृष्णा नदी
   ऊँचाई      - 145.10 मीटर
  लम्बाई    - 512 मीटर   "
बाढ़ के दौरान श्रीसैलम जलाशय बहुत जल्दी भर जाता है और बाढ़ का बाकी पानी नागार्जुन सागर बाँध में बह जाता है जो कि कम ऊंचाई पर स्थित है।

बगलिहार बाँध 

यह भारत के जम्मू क्षेत्र के डोडा ज़िले में बनाया जा रहा है। 
यह जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर है और जम्मू से लगभग 150 किलोमीटर दूर बटौत शहर के पास है। 
नींव से इसकी ऊँचाई 144 मीटर और लंबाई 317 मीटर होगी। 
बगलिहार बाँध की जल धारण क्षमता एक करोड़ पचास लाख घन मीटर होगी। 
यह परियोजना साढ़े चार सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन करने वाली है।

पोंग डैम

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के शिवालिक पहाड़ियों के आर्द्र भूमि पर ब्यास नदी पर बाँध बनाकर एक जलाशय का निर्माण किया गया है जिसे महाराणा प्रताप सागर नाम दिया गया है। 
इसे पौंग जलाशय या पौंग बांध के नाम से भी जाना जाता है। 
यह बाँध 1975 में बनाया गया था। 
महाराणा प्रताप के सम्मान में नामित यह जलाशय या झील एक प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्य है और रामसर सम्मेलन द्वारा भारत में घोषित 25 अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि साइटों में से एक है।
जलाशय 24,529 हेक्टेयर (60,610 एकड़) के एक क्षेत्र तक फैला हुआ है, और झीलों का भाग 15,662 हेक्टेयर (38,700 एकड़) है।

नागार्जुन सागर बांध

कृष्णा नदी पर नागार्जुन सागर बांध दुनिया का सबसे बड़ा, पत्थर की चिनाई किया हुआ बांध माना जाता है। 
हैदराबाद से लगभग 150 किमी दूर, 2,15,000 वर्ग किमी के जलग्रहण क्षेत्र (कैचमेंट) के साथ, यह भारत की सबसे बड़ी नहर प्रणाली है जो व्यापक रूप से फैली हुई है। 
यह बांध सन् 1969 में पूरा हुआ, और यह 124 मीटर ऊंचा और एक किलोमीटर लंबा है। 
इसमें 26 क्रेस्ट गेट हैं। 
इसके जलाशय में 11,472 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा हो सकता है। 
पनबिजली उत्पादन के उद्देश्य से निर्मित यह परियोजना, स्वतंत्र भारत की पहली परियोजनाओं में से एक है।

हीराकुंड बाँध

हीराकुंड बाँध का निर्माण सन 1948 में शुरू हुआ था और यह 1953 में बनकर पूर्ण हुआ। 
वर्ष 1957 में यह बाँध पूरी तरह से काम करने लगा था।
यह बाँध संसार के सबसे लंबे बांधों में से एक है। 
इस बाँध की लंबाई 4.8 कि.मी. है तथा तटबंध सहित इसकी कुल लंबाई 25.8 कि.मी. है।
बाँध के तटबंध के कारण 743 वर्ग कि.मी. लंबी एक कृतिम झील बन गयी है। 
इसे 'हीराकुंड' कहते हैं।
हीराकुंड बाँध में दो अलग-अलग जल विद्युत-गृह हैं। 
यह विद्युत-गृह 'चिपलिम्मा' नामक स्थान पर हैं।
विद्युत-गृहों की कुल क्षमता 307.5 मेगावाट है। 
इस विद्युत-शक्ति का उपयोग उड़ीसा, बिहार, झारखंड में विभिन्न कारखानों तथा औद्योगिक इकाइयों में किया जा रहा है।
बाँध से तीन मुख्य नहरें निकाली गयी हैं। 
दाहिनी ओर 'बोरागढ़ नहर' और बाईं ओर से 'सासन' और 'संबलपुर नहर'।

महत्वपूर्ण तथ्य 

उत्तराखंड में भारत का सबसे ऊंचा और विशाल टिहरी बांध है।
टिहरी बांध एशिया का दूसरा सबसे ऊँचा बांध और दुनिया में आठवाँ सबसे ऊँचा बांध है।
इस बांध की ऊंचाई 857 फीट (260.5 मीटर) है जबकि इसकी लंबाई 575 मीटर है तथा इससे 2400 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
सरदार सरोवर बांध भारत का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बांध है। 
गुजरात में वडोदरा जिले के दभोई में स्थित सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 138.68 मीटर और लंबाई 1210 मीटर है।

दुनिया के सबसे लंबे बांधों में से एक हीराकुंड बांध ओडिशा के संबलपुर में है। 

साल 1956 में महानदी पर बने इस बांध की लंबाई 26 किलोमीटर है, जो देश का सबसे लंबा और दुनिया के लंबे बांधों में से एक है।
आधुनिक तकनीक से बना नागार्जुन सागर बांध अपनी मजबूती के साथ-साथ अपनी भव्य बनावट और खूबसूरती के लिए भी प्रसिद्ध है। 
आंध्र प्रदेश के नलगोंडा जिले में कृष्णा नदी पर बना यह बांध आंध्र प्रदेश के लिए सिंचाई का अहम साधन है। 
नागार्जुन सागर डैम की ऊंचाई 124 मीटर और लंबाई 1450 मीटर है।

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