Bharat Ki Sthiti Or Vistar - भारत की स्थिति और विस्तार

Bharat Ki Sthiti Or Vistar PDF - भारत की स्थिति और विस्तार 

भारत : एक सामान्य परिचय

प्राचीन भारतीय धार्मिक ग्रन्थों में भारत के बारे में कहा गया है कि "पृथ्वी के उस भू–भाग को जो उत्तर में हिमाद्रि एवं हेमकट पर्वत (वर्तमान में हिन्द महासागर) तक फैला जहाँ सम्राट् भरत के वंशज का निवास है, भारत कहलाता है।
भारत विश्व में कई नामों से प्रचलित है। 
पुराणों में भारत वंश का अधिकार क्षेत्र होने के कारण इसे भारतवर्ष कहा गया। 
आगे चलकर जब इस प्रदेश पर आर्यों का अधिकार हुआ तो इसका नाम आर्यावर्त पड़ा। 
फिर ईरानियों के द्वारा यहाँ बहने वाली सिंधु नदी के नाम पर इस प्रदेश को हिन्दुस्तान कहा।
इसी तरह यूनानियों ने सिंधु को इण्डोस (Indos) और रोम वासियों ने इण्डस (Indus) कहा और इसी आधार पर इस प्रदेश का नाम इण्डिया पड़ा। 
यही देश आज विश्व में भारत और इण्डिया दोनों नाम से प्रसिद्ध है। 
भारतीय संविधान में भी इसे इण्डिया और भारत दोनों नाम गया दिया है। 

भारत की स्थिति एवं विस्तार 

भारत उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित एशिया महादेश का एक विशाल देश है। 
इसका अक्षांशीय विस्तार 8°4' उत्तरी अक्षांश से 37°6' उत्तर अक्षांश तक तथा शांतीय विस्तार 68°7' पूर्वी देशांतर से 97025 पूर्वी देशांतर तक है। 
इस प्रकार इसका अक्षाशीय तथा देशांतरीय विस्तार लगभग 30° है। 
Note:  भारत की मुख्य भूमि का दक्षिणतम अक्षांश 84 है जबकि भारत का सबसे दक्षिणतम बिन्दु इंदिरा प्वाइंट का अक्षांश 6°4' है।
कर्क रेखा भारत के बीचो-बीच 8 राज्यों से होकर गुजरती है। 
ये राज्य निम्न है- गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा (त्र.) एवं मिजोरम।
82°30' पूर्वी देशांतर को भारत का मानक याम्योत्तर या मीन टाइम लाइन माना गया है।
यह उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के निकट मिर्जापुर के नैनी से गुजरती है। 
इसी के कारण इलाहाबाद को 'शून्य मील केन्द्र' कहा जाता है।
किसी भी देश के मानक याम्योत्तर का चुनाव 7°30' देशांतर के गुणक के साथ साथ देश के मध्य से गुजरने की शर्तों पर किया जाता है। 
इसी आधार पर 82°30' याम्योत्तर को भारत का मानक याम्योत्तर चुना गया है। 
यह ग्रीनविच (लंदन) मीन टाइम लाइन से 5 : 30 मिनट आगे है।

भारतीय समय की गणना

चूँकि 1 देशान्तर पर समय 4 मिनट आगे बढ़ है इसलिए 82° पर 82x4 =328 मिनट और 1/2 का 2 मिनट जोड़ने पर समय कुल 330 मिनट होगा, जिसे घंटा में तब्दील करने पर समय 3 घंटा 30 मिनट होगा। 
चूंकि भारत पूर्वी दशान्तर पर स्थित है इसलिए समय ग्रीनविच मीन टाईम से 5 घंटा 30 मिनट आगे होगा।

भारत की सीमा के  बिंदु  

भारत का उत्तरी बिंदु - 

इंदिरा कॉल-भारत का अंतिम उत्तरी छोर जम्मू-कश्मीर (J&K)प्रांत में सियाचीन ग्लेशियर के पास स्थित इंदिरा कॉल है। 
यह हिमालय पर्वतमाला में भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा के पूर्व में स्थित है। 
इंदिरा कॉल समुद्र से करीब 7000 मीटर की ऊँचाई पर है। 

भारत का दक्षिणी बिंदु - 

इंदिरा प्वाइंट-इंदिरा प्वाइंट भारत के दक्षिणी छोर के अंत में 6°45' उत्तरी अक्षांश पर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप पर स्थित है। 
पहले इसे पिग्मैलियन प्वाइंट या पार्सस प्वाइंट के नाम से भी जाना जाता था। 
इंदिरा प्वाइंट सुमात्रा से 140 km और कैम्पवेल की खाड़ी (भारत के अंतिम परिचालन आधार) के 'प्वाइंट जीरो' से 51 km दुर है। 
2004 में भारतीय महासागर क्षेत्र में आए भूकम्प से पैदा हुई सूनामी के कारण इंदिरा प्वाइंट का बड़ा भाग समुद्र में डूब गया। 
भूमध्य रेखा से इसकी दूरी 876 km है। 

भारत का पूर्वी बिंदु -

किबिथू, भारत के पूर्वी छोर के अंत में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 28°017' उत्तरी अक्षांश और 97°9402' पूर्वी देशांतर के बीच अरुणाचल प्रदेश के अंजा जिले में स्थित एक गाँव है। 
यह समुद्र तल से 11000 फुट की ऊँचाई पर चीन के तिब्बत सीमा क्षेत्र के पास स्थित है। 

भारत का पश्चिमी बिंदु -

धुअरभोटा, भारत के पश्चिमी छोर के अंत में 23°87' उत्तरी और 68°52' पूर्व अक्षांश/दंशांतर के बीच गुजरात राज्य के कच्छ क्षेत्र में स्थित है। 
धुअरभोटा भारत और पाक के बीच विवादित सरक्रीक लाइन के नजदीक है। 

भारत के मुख्य भूमि का दक्षिणी छोर- 

कन्याकुमारी जिसे केप केमोरिन भी कहा जाता है 8°4' उत्तरी अक्षांश और 27857 पूर्वी देशांतर के बीच तमिलनाडु राज्य में है। 
कन्याकुमारी अरब सागर, हिन्द महासागर का संगम स्थल तथा पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट का अंतिम बिन्दु है। 

भारत की आकृति चतुष्टकोणीय है। 
कश्मीर से कन्याकुमारी तक (उत्तर-दक्षिण में) इसकी लम्बाई 3214 km है।
तथा कच्छ के रण से अरुणाचल प्रदेश तक पूर्व-पश्चिम दिशा में इसकी चौड़ाई 2993 km है। 
इस प्रकार भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग कि.मी. है, जो विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 2.4% (लगभग) है।
इस प्रकार भारत विश्व का 7वाँ सबसे बड़ा देश है। 
इससे 6 बड़े देश निम्न हैं - 
क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व के 6 सबसे बड़े देश 

देश
क्षेत्रफल (वर्ग किमी)
1.रूस
170.7
2. कनाडा
99.73
3. चीन
95.9 
4. U.S.A
93.7
5. ब्राजील
85.1
6. आस्ट्रेलिया
76.8

भारत की स्थल सीमा की कुल लम्बाई 15200 km है जो बंग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, भूटान तथा अफगानिस्तान को छूती है।
नोट : अफगानिस्तान की सीमा वर्तमान में पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में है जिसे भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपना कहते हैं।
अत: प्रत्यक्ष तौर पर भारत की सीमा अफगानिस्तान से नहीं सटी है।

पड़ोसी देश की सीमा से सटे भारतीय राज्य - 

पड़ोसी देश
सीमा की ल० km
सीमा से सटे राज्यों की सं.
सीमा से सटे भारतीय राज्यों के नाम
बंगलादेश 
4096.7
5
पश्चिम बंगाल,असम,  मेघालय, त्रिपुरा, मिज़ोरम
chin
3488
5
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश
पाकिस्तान
3323
4
जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात
नेपाल
1751
5
उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, प. बंगाल, सिक्किम
म्यांमार
1643
4
अरुणाचल प्रदेश, नागालैण्ड, मणिपुर, मिजोरम
भूटान
699
4
सिक्किम, पं. बंगाल, असम, अरुणाचल
प्रदेश
अफगानिस्तान
106
1
जम्मू-कश्मीर

भारत की सीमाएँ

किसी देश की सीमाएँ उस देश की प्राकृतिक बनावट, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियाँ, उसके इतिहास, परम्परा और प्रकृति द्वारा निर्धारित होती है।
किसी देश की सीमाओं को दो भागों में बाँटा जा सकता है-
(1) प्राकृतिक सीमाएँ और
(2) कृत्रिम सीमाएँ

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1. प्राकृतिक सीमाएँ -

समुद्र, पर्वत शृंखलाएँ, मरुस्थल एवं नदियाँ जैसे प्राकृतिक कारकों के आधार पर निर्धारित सीमा प्राकृतिक सीमा कहलाता है।
प्राकृतिक सीमा में सबसे अधिक महत्त्व पर्वत-प्रणालियों और जल विभाजक का होता है।
उत्तर में हिमालय पर्वत श्रेणी, सुदूर-पूर्व में आराकानयोमा श्रेणी, दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर और दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी तथा दक्षिण में हिन्द महासागर ये सभी मिलकर भारत की प्राकृतिक सीमाएँ बनाते हैं।

2. कृत्रिम सीमाएँ-

किसी देश की कृत्रिम सीमाएँ परिस्थितियाँ, युद्धों, संधियों आदि के आधार पर निर्मित होती है जो अस्थायी प्रकृति की होती है अर्थात् कृत्रिम सीमाओं में समय-समय पर परिवर्तन होता रहता है।
भारत की स्थलीय-सीमा पर उत्तर में नेपाल, भूटान और चीन (तिब्बत) पूर्व में बंग्लादेश एवं म्यांमार तथा उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान और अफगानिस्तान देश स्थित है।
इसके साथ-भारत की प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों प्रकार की सीमाएँ बनती है।
इन सभी देशों के साथ भारत की जो सीमा लगी हुई है।
उसे कुछ नामों से जाना जाता है जो निम्न है -

रेडक्लिफ रेखा -

भारत पाकिस्तान एवं भारत-बंग्लादेश के बीच की रेखा की रेडक्लिफ रेखा कहा जाता है क्योंकि भारत के विभाजन के बाद पश्चिमी पाकिस्तान (वर्तमान पाकिस्तान) और पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बंग्लादेश) के बीच सीमा निर्धारिण का कार्य 1947 में सर सीरिल रेडक्लिफ के द्वारा किया।

डुरण्ड रेखा-

भारत और अफगानिस्तान की सीमा को डुरण्ड रेखा के नाम से जाना जाता है।
इस सीमा रेखा का निर्धारित सर मोर्टीमर डुरण्ड के द्वारा 1896 में किया गया।
चूँकि इस समय भारत-पाक विभाजन नहीं हुआ था इसलिए स्वतंत्रता से पूर्व यह भारत और अफानिस्तान के बीच की सीमा रेखा थी।
विभाजन के बाद इस रेखा का बहुत बड़ा भाग पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की सीमा रेखा हो गया और बहुत ही छोटा हिस्सा (106 km) भारत-अफगानिस्तान की सीमा रेखा के रूप में बचा।
इस छोटे से हिस्से पर भी पाकिस्तान ने कबिलाई आक्रमण के द्वारा कब्जा कर लिया।
इसी सीमा रेखा से सटे जम्मू कश्मीर के भाग को पाक अधिकृत कश्मीर (POK) कहा जाता है।

मैकमोहन रेखा-

भारत और चीन के बीच इस सीमारेखा का निर्धारण 1913-14 में एक त्रि-सदस्यी सम्मेलन (तिब्बत, चीन और भारत के प्रतिनिधि) से संधि से हुआ।
भारत की ओर से इस सम्मेलन में सर हेनरी मैकमोहन ने भाग लिया था।
चीन के प्रतिनिधि इवान चेन तथा तिब्बत की ओर से 13वें दलाईलामा के प्रतिनिधि लोंगधेन गदेन शात्र पलजोर दोर्जे थे।
इस संधि के अनुसार तिब्बत की ओर बहने वाली सांग्पो और भारत में बहने वाली ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों के बीच से 30,00040,000 मीटर ऊँचे पर्वत शिखर पर अंतर्राष्ट्रीय सीमा निर्धारित की गई।

24वीं समांतर रेखा-

यह कच्छ में भारत और पाक के बीच की सीमा रेखा है परंतु पाकिस्तान के द्वारा इसे मान्यता नहीं दी गई है।
भारत की स्थल सीमा की कुल लम्बाई 15,200 किमी. है।
भारत की मुख्य भूमि की तटीय सीमा की लम्बाई 6100 किमी. है।
यदि अण्डमान निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप समूहों की तटरेखा को सम्मलित किया जाय तो भारत की तटीय सीमा 7515 किमी. हो जाती है।
22° उत्तरी अक्षांश के दक्षिण में भारतीय महाद्वीप धीरे-धीरे संकरा हो जाता है और हिन्द महासागर को दो भागों में बाँटता है।
जिसे पश्चिम अरब सागर तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी कहते हैं।
भारत और म्यांमार के बीच हिमालय से निकलने वाली पूर्वी श्रेणियाँ (लुशाई, पटकोई और अराकानयोमा) स्थलीय सीमा बनाती है।
ये भारत को इरावदी की घाटी द्वारा म्यांमार से अलग करती है।

भारतीय समुद्री जलसीमा

भारत की प्रादेशिक जल सीमा (Territorial Sea) उसकी तट रेखा से 12 समुद्री मील (1 समुद्री मील = 1.85200 km) अंदर समुद्र तक है।
इस क्षेत्र के प्रयोग का भारत को सम्पूर्ण अधिकार है।
प्रादेशिक जल सीमा से आगे (+12 समुद्री मील) या तट रेखा से 24 समुद्री मील की दूरी तक के क्षेत्र को संलग्न क्षेत्रमण्डल' (Contiguous Zone) कहते हैं।
इस क्षेत्र में भारत को राजकोषीय अधिकार, सीमा शुल्क से संबंधित अधिकार, स्वच्छता से संबंधित अधिकार तथा अप्रवासी कानून लागू करने का अधिकार है। '
अनन्य आर्थिक क्षेत्र' (Exclusive Economic Zone) के तहत् संलग्न क्षेत्र के आगे संलग्न क्षेत्रमंडल क्षेत्र आते हैं जो तट रेखा से 200 समुद्री मील की दूरी तक है।
इस क्षेत्र के अन्तर्गत भारत को खनिज संपदा, सागरीय जल शक्ति, सागरीय जीवों तथा समुद्री खनिजों के संरक्षण दोहन एवं अनुसंधान का अधिकार है।
भारतीय राज्यों में गुजरात राज्य की तटरेखा सबसे लंबी-1200 km है।
इसके बाद आंध्र प्रदेश की तटरेखा लम्बी है।
भारत के 9 राज्य गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश, उड़ीसा एवं पश्चिम बंगाल तटरेखा से लगे हैं।

प्रमुख जलडमरू मण्डल

8° चैनल - मालदीव और मीनीकॉय
9° चैनल - लक्षद्वीप और मीनीकॉय
10° चैनल - अंडमान और कार निकोबार   
ग्रैंड चैनल - सुमात्रा और निकोबार 
पाक स्ट्रेट - तमिलनाडु और श्रीलंका 
मन्नार की खाड़ी - द. पू. तमिलनाडु और श्रीलंका 
डंकन पास - दक्षिणी अंडमान और लघु अंडमान के मध्य 
कोको स्ट्रेट - कोको द्वीप (म्यांमार) और उत्तरी अंडमान के मध्य 
लक्षद्वीप सागर - लक्षद्वीप और मालवार तट
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भारत की तटरेखा

भारत के मुख्य भूमि की तटीय सीमा की लम्बाई 6100 किमी. है।
यदि अण्डमान निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप समूहों के तटरेखा को भी सम्मलित किया जाय तो भारत की तटीय सीमा 7515 km हो जाती है।
हिन्द महासागर और अरबसागर से सटी भारत की यह तटरेखा प्राकृतिक, सामरिक और आर्थिक सभी नजरिये से महत्त्वपूर्ण है।
इसे मुख्यतः दो भागों में बाँटा गया है-
(1) पश्चिम तटरेखा
(2) पूर्वी तटरेखा।
पश्चिमी तट को चार अलग-अलग उपभागों में बाँटा गया है-
(i) कठियावाड़ तट
(ii) कोंकण तट
(iii) मालबाड़ तट
(iv) दक्षिणी तट
इसी प्रकार पूर्वी तटरेखा को भी दो उपभोगों में बाँटा गया है-
(1) कोरोमण्डल तट और
(2) काकीनाडा या उत्तरी सरकार तट।

पश्चिमी तट रेखा (Western Coastline) - 

खंभात की खाड़ी से कुमारी अंतरीप तक फैले हुए तट को पश्चिमी तट कहते हैं।
इसके उत्तरी भाग को कठियावाड़ और कोंकण तट तथा दक्षिणी भाग मालवाड़ और दक्षिणी तट के नाम से जाना जाता है।
कठियावाड़ तट का विस्तार गुजरात के सौराष्ट्र (कच्छ) से सूरत तक है।
इसी तट में कच्छ की खाड़ी और खंभात की खाड़ी है जिसके कारण यह क्षेत्र कभी फटा-फटा है।
फलस्वरूप यहाँ अनेक प्राकृतिक बंदरगाह विकसित हुए।
इनमे कांडला, पोरबंदर, द्वारका, भरुच, सूरत आदि प्रमुख हैं।
कोंकण तट सूरत से लेकर गोआ तक 500 किमी. लम्बाई में फैला हुआ है।
कोंकण तट पर पाए जाने वाले बंदरगाह है- न्हावासोवा, मारभागोआ, मुम्बई, माहिम, रत्नागिरि और मालवन।
मालबार तट गोवा से मंगलौर तक 225 किमी. की लम्बाई में फैला है।
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दक्षिण-पश्चिम मानसून सर्वप्रथम भारत में यहीं प्रवेश करता है।
कोच्चि के समीप समुद्र तट के समानांतर पृष्ट जल (Back Water) की सुविधा होने से अरब सागर से केरल के भीतरी भागों तक नावों द्वारा पहुँचा जा सकता है।
मंगलौर, कोझीकोड, एलप्पी, अर्नाकुलम, मालपे, तिरुवनन्तपूरम, कासरगोड, कुण्डापुर आदि इस तट पर पाए जाने वाले प्रमुख बंदरगाह है।
दक्षिणी तट मंगलौर से कुमारी अंतरीप तक 500 किमी. लम्बाई में फैला हुआ है।
यह काफी चौड़ा तटीय मैदान है, किन्तु इस तट पर द्वीपों का पूर्ण अभाव है।

पूर्वी तट रेखा (Eastern Coastline) 

पूर्वी तटरेखा कृष्णा नदी से कमारी अंतरीप तक विस्तृत है।
भू-आकृति के आधार पर इसे दो भागों में बाँटा जाता है-
(i) कोरोमण्डल तट और
(ii) काकीनाडा या उत्तरी सरकार तट।
कोरोमण्डल तट, कुमारी अंतरीप से कृष्णा नदी डेल्टा लक फैला हुआ है।
इसी तट पर मन्नार की खाड़ी, पाक जल संधि तथा आदमसेतु खाड़ियां है।
कन्याकुमारी, रामेश्वरम्, धनुष्कोटि, नागापट्टिनम्, कारीकल, पुदुचेरी, पोर्टोनोवा इत्यादि इस तट पर के प्रमुख्न बंदरगाह है।
पब्बन एवं श्रीहरिकोटा यहाँ के प्रमुख द्वीप हैं।
श्री हरिकोटा द्वीप ही पुलीकट झील को समुद्र से अलग करता है।
भारत सरकार का सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SHAR) श्री हरिकोटा द्वीप पर ही अवस्थित है।
काकीनाडा तट या उत्तरी सरकार तट का विस्तार कृष्ण डेल्टा से लेकर गंगा डेल्टा तक है।
बंगाल की खाड़ी के उत्तरी सिर पर यह तट गंगा, महानदी जैसी नदियों के द्वारा निर्मित डेल्टाओं से घिरा है।
सुन्दरवन डेल्टा इसी तट पर है जिसका निर्माण गंगा और मेघना नदी के द्वारा किया गया है।
काकीनाडा, विशाखापट्टनम पारादीप, हल्दिया, कोलकाता आदि इस तट के प्रमुख बंदरगाह है।


द्वीप समूह

भारत के तटीय भागों में द्वीपों का प्रसार मुख्यत: दो तरह का है।
प्रथम ऐसे द्वीप जो तट के प्रायः निकट है तथा दूसरा ऐसे द्वीप जो तट से काफी दूर है।
ऐसा देखा गया है कि तट के नजदीक वाले द्वीप प्रायः छोटे आकार के हैं जबकि तट से दूर वाले द्वीप बड़े आकार के है।
भारत में द्वीपों की संख्या 572 है।

तट के निकटवर्ती द्वीप

ऐसे द्वीप प्रायः डेल्टाई भागों में पाया जाता है।
गंगा के डेल्टाई प्रदेश में हुगली के निकट 20 किमी. लंबा सागर द्वीप (जो गंगासागर नाम से जाना जाता है)।
चौबीस परगना के पास न्यू मरे द्वीप, महानदी के डेल्टाई भाग में शौर्ट द्वीप तथा नदी के मुहाने पर स्थित ह्वीलर द्वीप निकटवर्ती द्वीप के उदाहरण है।
इन द्वीपों का निर्माण मुख्यतः नदीयों के जलोढ़ (कांप मिट्टी) के जमाव से होता है।
मन्नार की खाडी के निकट नगरकोईल से 5 किमी. दर क्रोकोडाईल एवं 2-3 किमी. दूर अंठा और कोटा द्वीप, हरनोई के निकट जंजीरा कोर्ट, मुम्बई के निकट हैनरे तथा कैनरे द्वीप, एलिफेण्टा द्वीप और बेसिन के निकट अरवाला द्वीप कुछ अन्य निकटवर्ती द्वीप है।
भारत और श्रीलंका के बीच आदम पुल (Admins Bridge) तथा रामेश्वरम का पम्बन द्वीप बालू और कांप मिट्टी से निर्मित है।
नर्मदा और ताप्ती नदियों के चौड़े मुहाने के निकट आलियाबेट, खडियाबेट, खंभात की खाड़ी के निकट डयू तथा कच्छ की खाड़ी में बैद, नोरा, पिरटान और करूंभार कुछ ऐसे द्वीप है जो निम्न और संकरे प्रकार के हैं।

तट से दूर वाले द्वीप (Farther Island)-

तट से दूर वाले द्वीप सामान्यतः दो समूहों में हैं-
(1) लक्षद्वीप समूह और
(2) अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह।

लक्षद्वीप समूह-

क्षेत्रफल- 32 वर्ग किमी.
राजधानी-कवारत्ती
भाषा- मलयालम
स्थिति- 8 और 12° अक्षांश तथा 71° और 74° पूर्वी देशांतर के मध्य अरब सागर में।
लक्षद्वीप समुह एक डूबे हुए पर्वत के भाग है जिसकी उत्पत्ति प्रवाल भिलियों के विकसित होने से हुई।
1973 में लंकाद्वीप, मिनिकाय और अमीन द्वीप को सम्मिलित नाम दिया गया है।
लक्षद्वीप प्रवाल द्वीपों का समूह है जिसमें 12 प्रवाल द्वीप, 3 प्रवाल भित्ति और जलमग्न बालू के तट शामिल है।
यहाँ के कुल 43 द्वीपों में से केवल 11 में आबादी है।
लक्षद्वीप समूह के उत्तर में चेरबनियानी रीफ है तथा सबसे दक्षिण में मिनिकॉय द्वीप है।
8० चैनल (8° उत्तरी अक्षांश) मिनिकॉय और एवं मालद्वीप के बीच है।
9० चैनल (9° उत्तरी अक्षांश) मिनीकॉय को मुख्य लक्षद्वीप समूह से अलग करता है।

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह या मरकत द्वीप-

क्षेत्रफल- 8,248 वर्ग किमी.
राजधानी- पोर्टब्लेयर
भाषा- हिन्दी, निकोबारी, तमिल, बंगला, मलयालम, तेलगू।
स्थिति- 6°से 14° उत्तरी अक्षांश तथा 92° से 94° पूर्वी देशांतर के बीच बंगाल की खाड़ी स्थित है।
अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 204 छोटे छाट द्वीप सम्मलित है जो 100 किमी. क्षेत्र में नेगरिस अंतरीप और सुमात्रा के बीच बंगाल की खाड़ी में स्थित है।
अंडमान द्वीप निकोबार द्वीप से 10 चैनल द्वारा पृथक् है।
अंडमान द्वीप उत्तरी अंडमान, मध्य अंडमान, दक्षिणी अंडमान का सम्मिलित रूप है।
नारकोंडम द्वीप (उत्तरी अंडमान के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित) एक ज्वालामुखी द्वीप है।
बैरन द्वीप जो भारत का एकमात्र जाग्रत ज्वालामुखी है, जो मध्य अंडमान के पूर्वी भाग में अवस्थित है।
अंडमान निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर, दक्षिणी अंडमान द्वीप पर स्थित है।
डंकन दर्रा दक्षिणी अंडमान और लघ अंडमान के बीच है।
निकोबार द्वीप: कार निकोबार, छोटा निकोबार तथा ग्रेट निकोबार द्वीप का सम्मलित रूप है।
गैड चैनल ग्रेट निकोबार और सुमात्रा के मध्य में है।
भारत का दक्षिणतम् बिन्दु इंदिरा प्वाइंट ग्रेट निकोबार द्वीप का दक्षिणी बिन्दु है।
अंडमान द्वीप के सबसे उत्तर में लैंडफॉल द्वीप है।
दक्षिणी अंडमान के दक्षिण में छोटा अंडमान द्वीप समूह है जो लगभग 204 छोटे-छोटे द्वीप है।

इसके दो प्रमुख समूह है-
अक्रिपेलागो और लेबीरिथ द्वीप समूह।
अंडमान द्वीप का सर्वोच्च शिखर सैडल पिक चोटी है जिसकी ऊँचाई 738 मीटर है।
निकोबार द्वीप की सर्वोच्च चोटी धुलियार है जिसकी ऊँचाई 642 मीटर है।

सुन्दरवन डेल्टा-

यह गंगा के मुहाने पर स्थित है तथा भारत के पश्चिम बंगाल से लेकर बंग्लादेश तक फैला हुआ है।
सुंदरवन डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है।
सुंदरी पेड़ों की अधिकता के कारण इसे सुन्दरवन डेल्टा कहते हैं।
हुगली और मेना के बीच फैले इस डेल्टाई प्रदेश का क्षेत्रफल 51,300 वर्ग किमी. है।


मन्नार की खाड़ी-

यह हिन्द महासागर की एक भुजा है, जो भारत के दक्षिणी बिन्दु एवं श्रीलंका के पश्चिमी भाग में अवस्थित है।
भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिणी हिस्से में 160 से 200 किमी. चौडाई क्षेत्र में अवस्थित मन्नार की खाडी में जीव-जन्तओं की अनेकानेक प्रजातियां पाई जाती है।

एडम्स ब्रिज (रामसेतु)-

रामसेतु श्रीलंका के पास मन्नार द्वीप और भारत के बीच चुने के पत्थरों से बने छोटे-छोटे टीलों की एक श्रृंखला है।
भारत में धनुषकोटि के पास से यह शृंखला शुरू होती है और श्रीलंका के तलाईमन्नार तक जाती है।
एडम्स ब्रिज (रामसेतु) पाक जलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी को विभाजित करता है।

Bharat Ki Sthiti or Vistar PDF

Name of The Book : *Bharat Ki Sthiti or Vistar PDF in Hindi*
Document Format: PDF
Total Pages: 08
PDF Quality: Normal
PDF Size: 1 MB
Book Credit: Harsh Singh
Price : Free



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