Rajasthan Ke Mahal in Hindi

राजस्थान के प्रमुख महल - Rajasthan Ke Mahal PDF

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आज का हमारा टॉपिक है Important Places of Rajsthan यानि राजस्थान के प्रमुख महल। 
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Rajasthan Ke Mahal

मुबारक महल 

  • यह जयपुर के राज प्रसादों की इमारतों में यह सबसे नया महल है। 
  • इसका निर्माण सवाई माधोसिंह द्वितीय ने 1900 ई. में अपने अंग्रेज मेहमानों के स्वागत व ठहरने के लिए कराया था।
  • यह महल चूने और पत्थर से बना है, किंतु इसका बाहरी प्रारूप ऐसा दिखाई देता है जैसे कि लकड़ी का बना हुआ है।
  • महल की ऐसी बनावट पत्थर की बारीक कारीगरी के कारण दिखाई देती है। 
  • इस महल में मुगल, यूरोपीय तथा राजपूत स्थापत्य कला का अद्भुद समन्वय दिखाई देता है।  
  • मुबारक महल सवाई मानसिंह द्वितीय के कार्यकाल तक विद्वानों की परिचर्चा का केंद रहा तथा वर्तमान में यह शाही पुस्तकालय के रूप में जाना जाता है।

चंद्रमहल सिटी पैलेस ( राजमहल) 

  • इस महल का निर्माण सवाई जयसिंह की आज्ञा से जयपुर के वास्तुकार विद्याधर चक्रवर्ती ने करवाया था। 
  • यह महल सात मंजिल बना हुआ है। 
  • इस महल की सबसे नीचे की मंजिल 'चंद्रमहल' भूतल पर बना हुआ है। 
  • चंद्रमहल के बरामदे की दीवारों पर जयपुर के राजाओं के पूरे आकार के चित्र बने हुए हैं। 
  • महल की साज सज्जा मानसिंह द्वितीय ने जर्मन कलाकार ए.एच. मूलर से करवाई थी। 
  • इस महल की दूसरी मंजिल 'सख निवास' (सवाई जयसिंह की रानी सुख कॅवर के नाम पर), तीसरी मंजिल को 'रंग मंदिर', चौथी मंजिल को 'शोभा निवास', पाँचवीं मंजिल को 'छवि निवास', छठी मंजिल को 'श्री निवास' तथा सातवीं मंजिल को 'मुकुट मंदिर' कहा जाता है। 
  • सिटी पैलेस में विश्व के सबसे बड़े चाँदी के दो पात्र रखे हुए हैं। 
  • यहाँ स्थित इमारतों में मुबारक महल, सिलह खाना, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, पोथीखाना विशेष प्रसिद्ध है।
  • यहाँ स्थित दीवान-ए-आम में महाराजा का निजी पुस्तकालय (पोथीखाना) स्थित है। 
  • इसे 'चंद्रमहल' भी कहते हैं। 
  • यह जयपुर राजपरिवार का निवास स्थान है।

हवा महल 

  • इस महल का निर्माण 1799 ई. में 'सवाई प्रतापसिंह' ने करवाया। 
  • इस महल के प्रमुख वास्तुकार ‘लालचंद्र उस्ता' थे।
  • यह महल रोधा एवं कृष्ण को समर्पित है तथा यह महल 'मुकुट के आकार' का है। 
  • कारण कर्नल जेम्स टॉड ने इस महल को कृष्ण का मुकुट' कहा है। 
  • इस महल की ऊँचाई 88 फीट है तथा इस महल में 365 जाली-झरोखे व 953 खिड़कियाँ हैं, इसी कारण इसे 'एयर दुर्ग' कहते हैं। 
  • महल की मुख्य दीवार की चौड़ाई एक फुट से भी कम है। 
  • महल की पाँच मंजिलें, यथा 'शरद मंदिर, रतन मंदिर, विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर तथा हवा मंदिर', हैं। 
  • यह महल बलुआ पत्थर तथा चूने से निर्मित किया गया है। 
  • 1983 में इसके पीछले हिस्से में राज्य सरकार द्वारा हवामहल म्यूजियम का संचालन किया जा रहा है। 
  • इस महल की सुन्दरता का वर्णन करते हुए एडविन आलौल्ड ने लिखा है कि "अलादीन का जिन भी इससे अधिक मोहक निवास स्थान का सृजन नहीं कर सकता था।"

जल महल 

  • जयपुर के जलमहल का निर्माण सवाई जयसिंह ने करवाया था। 
  • ईश्वरविलास महाकाव्य के अनुसार, सवाई जयसिंह ने जयपुर की जलापूर्ति के लिए गर्भावती नदी पर बाँध बनाकर मानसागर तालाब बनवा कर इसके मध्य इन महलों का निर्माण करवाया। 
  • जलमहल मध्यकालीन महलों की भाँति मेहराबों, बुों, छतरियों तथा सीढ़ीदार जीनों से बना दो मंजिला
  • और वर्गाकार रूप से निर्मित है। 
  • इसके समीप आमेर की घाटी के नीचे फूलों की घाटी और कनक वृन्दावन मंदिर स्थित हैं। 
  • इसका निर्माण भी सवाई जयसिंह ने करवाया था। 
  • यह भी कहा जाता है कि सवाई जयसिंह ने अश्वमेघ यज्ञ में आमंत्रित ब्राहमणों के भोजन व विश्राम की व्यवस्था इसी जलमहल में कराई थी।

आमेर के महल 

  • ये महल आमेर दुर्ग में स्थित हैं। 
  • इनका निर्माण राजा मानसिंह-प्रथम ने 1599 ई. में करवाया था। 
  • ये महल हिंदु व मुगल स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण हैं।

एक जैसे 9 महल 

  • इन महलों का निर्माण सवाई माधोसिंह द्वितीय ने करवाया था। 
  • इन महलों के नाम सूरजप्रकाश, खुशहाल प्रकाश, जवाहर प्रकाश, ललित प्रकाश, चन्द्रप्रकाश, रत्नप्रकाश तथा बसन्त प्रकाश है। 
  • ये महल उनकी 9 पासवानों के लिए बनवाये गये थे तथा ये नाहरगढ़ दुर्ग में स्थित है। 
  • ये सारे भवन एक प्रांगण को तीन ओर से घेरकर एक ही पंक्ति में बने हुए हैं अत: मार्ग से आपस में जुड़े हुए हैं। 
  • ये सभी महल स्थापत्य, रंग व आकृति में एकसमान है।

सामोद महल 

  • सामोद महल चौमू से 9 किलोमीट दूर स्थित है। 
  • इस महल का निर्माण राजा बिहारीदास ने करवाया था। 
  • सामोद के शीश महल में काँच का अति सुन्दर कार्य है जिसका निर्माण शिवसिंह ने करवाया था। 
  • सामोद महल के सुल्तान महल में शिकार के दृश्य तथा प्रणय के दृश्यों का अच्छा अंकन किया गया है। 
  • यह वर्तमान में हेरिटेज होटल में परिवर्तित हो चुका है।

डीग के जलमहल (डीग), भरतपुर

  • सर्वप्रथम 1725 ई. में राजा बदनसिंह ने डीग महल का निर्माण करवाया था। 
  • इसके बाद डीग के जलमहल का निर्माण भरतपुर के जाट राजा सूरजमल ने 1755 से 1765 ई.के बीच में करवाया।
  • डीग के भव्य महल सफ़ेद व लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है। 
  • डीग के महलों में गोपाल महल, सबसे अधिक भव्य व बड़ा है। 
  • इसके अलावा किशन महल, सूरज भवन, नंद भवन आदि भी दर्शनीय हैं। 
  • महलों के अलावा इन महलों में स्थित बाग व बगीचे भी स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण हैं। 
  • डीग को 'जलमहलों की नगरी' भी कहा जाता है।

उम्मेद पैलेस (जोधपुर)

  • इस भव्य राजप्रसाद का निर्माण जोधपुर के शासक उम्मेद सिंह ने करवाया था।
  • इस महल की नींव 18 नवम्बर, 1928 को रखी गई और यह 1940 में पूर्ण हुआ। 
  • यह महल छीतर पत्थर से बना होने के कारण छीतर पैलेस भी कहलता है। 
  • इस महल का निर्माण भीषण अकाल में जनता को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करवाया गया था। वर्तमान समय में इस महल के एक भाग में घड़ियों का एक विशाल संग्रहालय तथा दूसरे भाग में पाँच सितारा होटल संचालित है। 
  • तीसरे भाग में जोधपुर राजपरिवार निवास करता है।
  • विश्व का सबसे बड़ा रिहायशी महल है।

जसवंतथड़ा (जोधपुर) 

  • मेहरानगढ़ दुर्ग की तलहटी में स्थित इस भवन का निर्माण राजा सरदार सिंह ने राजा जसवंतसिंह की याद में 1906 ई. में करवाया था। 
  • यह सफ़ेद संगमरमर से निर्मित एक भव्य इमारत है। 
  • यह 'मारवाड़ का ताजमहल/राजस्थान का ताजमहल' कहलाता है।

एक थम्भा महल (जोधपुर) 

  • मंडोर में स्थित इस महल का निर्माण महाराणा अजीत सिंह के शासनकाल में विक्रम संवत् 1715 में कराया गया था। 
  • अष्ट पहलू के एक थम्ब आकार में बने इस महल के चारों तरफ बड़े-बड़े पत्थरों को तराशकर जालियों का रूप दिया गया है। 
  • भवन के निर्माण में प्रयुक्त पत्थर भूरे रंग का 'धाटू का पत्थर' है। 
  • इस महल को 'प्रहरी मिनार' भी कहा जाता है।

बादल निवास (महल) जैसलमेर 

  • इस महल का निर्माण 1884 ई. में सिलावटों द्वारा किया गया जिसे उन्होंने तत्कालीन महारावल बैरिशाल (वैरीशाल) सिंह को भेंट कर दिया। 
  • यह भवन पाँच मंजिला है। 
  • नीचे की चार मंजिले वर्गाकार हैं तथा सबसे ऊपरी व पाँचवीं मंजिल गुम्बादाकार (गोल) है। 
  • यह महल ऊँचाई के कारण इस प्रकार प्रतीत होता है कि व्यक्ति बादलों में विहार कर रहा हो इस कारण इसे बादल विलास भी कहा जाता है।

सुनहरी कोठी (टोंक) 

  • टोंक में बड़े कुएँ के पास स्थित नजर बाग में रत्न, काँच एवं सोने की झाल देकर बनाई गयी सुनहरी कोठी स्थित है। 
  • सुनहरी कोठी का निर्माण का प्रारंभ 1824 ई. में नवाब वजीउद्दौला खाँ ने 10 लाख रु. खर्च कर करवाया था। 
  • छत को सोने की परत से ढका गया है। 
  • इस सोने की परत पर बहुरंगी मिनाकारी व कुछ काँच भी जड़े हुए हैं। 
  • इसी कारण यह शीश महल के नाम से भी जानी जाती थी। 
  • इस कोठी की पहली मंजिल टोंक जिले के दूसरे नवाब वजीउद्दौला ने सन् 1834 में करवाया था। 
  • दूसरी मंजिल नवाब मोहम्मद इब्राहीम अली खाँ ने सन् 1870 में बनवाई । 
  • यह कोठी उस समय दीवान-ए-खास के नाम से भी जानी जाती थी। 
  • इसका सबसे पहले नाम 'जरनिगार' रखा गया था।

मुबारक महल (टोंक) 

  • मुबारक महल टोंक जिले में सुनहरी कोठी के दायरे में स्थित है। 
  • इसमें बकरा ईद के अवसर पर ऊँट की कुर्बानी दी जाती है। 
  • ऊँट की कुर्बानी टोंक के नवाब द्वारा दी जाती है। 
  • यह महल ऊँट की कुर्बानी के लिए प्रसिद्ध है। 
  • इस महल में टोंक रियासत के पहले नवाब अमीरूद्दौला ने 1817 ई. में ऊँट की कुर्बानी शुरू की थी।

अमली (अबली) मीणी का महल 

  • इस महल का निर्माण कोटा के राव मुकुंदसिंह ने इनकी चहेती पासवान अमली मीणी के लिए करवाया था। 
  • अमली के महल मुकुंदरा की पहाड़ियों के शिखर पर बने हुए हैं। 
  • ये अत्यंत साधारण प्रकार के भवन हैं जो अब खण्डहर हो चले हैं। 
  • इसे राजस्थान का दूसरा या छोटा ताजमहल' भी कहा जाता है। 
  • इस नाम से इसे उपमित करने वाले विदेशी इतिहासकार 'कर्नल जेम्स टॉड' थे।

जगमंदिर पैलेस 

  • यह महल पिछोला झील के मध्य में एक बड़े टापू पर बना हुआ है। 
  • इस महल को महाराणा कर्णसिंह ने बनवाना प्रारम्भ किया था। 
  • जिसको महाराणा जगतसिंह प्रथम द्वारा 1651 में पूर्ण करवाया गया। 
  • जगमंदिर के बाहर तालाब के किनारे पर पत्थर के हाथियों की एक पंक्ति बनी हुई है। 
  • जग निवास की अपेक्षा जगमंदिर प्राचीन है। 
  • इसी जगमंदिर में शहजादा खुर्रम ने अपने पिता जहांगीर से विद्रोह करने पर तथा 1857 ई.की क्रांति में नीमच से भागे अंग्रेजों ने शरण ली थी।

राजमहल (उदयपुर) 

  • यह महल पिछोला झील की पाल पर बना हुआ है। 
  • इसका निर्माण राणा उदयसिंह के द्वारा करवाया गया था। 
  • इस महल को प्रसिद्ध इतिहासकार फर्ग्युसन ने राजस्थान का विण्डसर' की संज्ञा दी है।
  • महल में 17वीं शताब्दी का एक संग्रहालय है जिसका संचालन राज्य सरकार कर रही है। 
  • यहाँ वह विशाल भाला भी रखा हुआ है जिससे महाराणा प्रताप ने जयपुर के राजा मानसिंह पर वार किया था।
  • राणा प्रताप के स्मारक के रूप में उदयपर का 'मोतीमहल' प्रसिद्ध है।

सज्जनगढ़ पैलेस 

  • यह महल समुद्र की सतह से 3100 फुट ऊँचा है। 
  • महाराणा सज्जन सिंह ने सुंदर महल बनवाना आरम्भ किया था परंतु महलों का काम महाराणा भूपाल सिंह ने पूर्ण कराया। 
  • इसकी पहली मंजिल में पत्थर की खुदाई का काम बड़ा ही सुंदर बना हुआ है। 
  • यह महल 'उदयपुर के मुकटमणि' एवं 'वाणी विलास महल' के नाम से विख्यात है। 
  • महाराणा सज्जन सिंह ने यहाँ विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे, पुष्प लतायें, पुतलियाँ और फव्वारे लगवाए। 
  • इस उद्यान के गुलाब (गुलाबबाड़ी) अपने आकार की वजह से प्रसिद्ध है इसी कारण इस उद्यान को 'गुलाब बाग' के नाम से भी जाना जाने लगा।

खेतड़ी महल 

  • झुंझुनूं खेतड़ी के महाराजा भोपाल सिंह (1735-1771) द्वारा अपने ग्रीष्म कालीन विश्राम हेतु अनेक खिड़कियों व झरोखों से सुसज्जित खेतड़ी महल का निर्माण करवाया।
  • इस महल में लखनऊ जैसी भूल-भूलैया एवं जयपुर के हवामहल की झलक देखने को मिलती है। 
  • इसलिए यह 'शेखावाटी का हवामहल' भी कहलाता है। 
  • यहाँ के शासक राव अजीतसिंह के काल (1889 ई.) में इस महल में स्वामी विवेकानंद रूके थे।

दीवान-ए-आम 

  • दीवान-ए-आम वह भवन है, जहाँ राजा का आम दरबार होता था। 
  • यहाँ राजा जनसामान्य से मिलता था। 
  • यह एक विशाल आयताकार भवन है जो 40 सुन्दर और मजबूत स्तिम्भों से सुशोभित है।
  • इन 40 खम्भों में से 16 खम्भे सफेद संगमरमर से व 24 लाल पत्थर से निर्मित हैं। 
  • ये सभी स्तम्भ कलात्मक हैं।
  • इसका निर्माण 'मिर्जा राजा जयसिंह' द्वारा करवाया गया था।
  • दीवान-ए-खास आमेर विशाल चौक के पूर्व में दीवान-ए-खास है। 
  • जिसे 'जय मंदिर' भी कहते हैं। 
  • यहाँ पर राजा अपने विशिष्ट सामंतों और अन्य प्रमुख लोगों से विचार विमर्श करता था। 
  • दीवान-ए-खास की विशेषता यह है कि इसमें खुदाई और काँच का सुंदर काम हआ है। 
  • इसमें दो विशाल कमरे, दोनों और दालान, फव्वारे से सुशोभित विशाल आंगन, स्नानागार, इत्यादि हैं। 
  • आमेर के दीवान-ए-खास का निर्माण 'मिर्जा राजा जयसिंह' ने करवाया था।

शीश महल 

  • आमेर के राजमहलों में सर्वाधिक प्रसिद्ध और चर्चित महल 'शीश महल' है। 
  • इस महल में चूने तथा गज मिट्टी से बनी दीवारों और छत पर जामिया काँच या शीशे के उत्तल टुकड़ों की जड़ाई का अत्यन्त सुंदर और बारीक काम हुआ है। 
  • महल के अंदर रात्रि के समय केवल मोमबत्ती जलाते ही व्यक्ति के सैंकड़ों प्रतिबिम्ब के साथ रोशनी दिखलाई पड़ती है।

यश मंदिर (महल) 

  • यश मन्दिर (महल) आमेर दुर्ग में दीवान-ए-खास की छतों के ऊपर निर्मित है। 
  • इस महल में सफेद संगमरमर की सुन्दर व अंलकृत जालियाँ लगी हुई हैं । 
  • यहाँ से रानियाँ दीवान-ए-खास का दृश्य देखा करती थीं। 
  • यह एक लम्बे बड़े कमरे के रूप में है। 
  • महल की छत की विशेषता यह है, कि इसकी छत पूर्ण रूप से धनुषाकार आकृति में बनी हुई है।


सुख मंदिर 

  • दीवान-ए-खास के सामने  बगीचे के दूसरी तरफ निर्मित सुख मन्दिर राजाओं का ग्रीष्मकालीन निवास है।
  • यह महल एक विशाल और लम्बे कमरे के रूप में है। 
  • इसकी दीवार में संगमरमर का एक सुन्दर झरना है, जो मेहराबनुमा चौखट से घिरा है। 
  • इस चौखट में बेल-बूटों के अंलकरणयुक्त सैंकड़ों छिद्र बने हैं। 
  • जिनसे शीतल मन्द पवन (हवा) भीतर आती है। 
  • इसमें झरने से एक नहर आती है जो महल को शीतल रखती है। 
  • महल के किंवाड़ों पर हाथी दाँत और चंदन का सुन्दर काम हुआ है।

रानी पद्मनी का महल

  • रानी पद्मनी का महल चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित है। जो दुर्ग को दूसरा बड़ा आकर्षण का केन्द्र है। 
  • यह महल एक शान्त और खूबसूरत जलाशय में अवस्थित है। 
  • सरलता और सादगी से परिपूर्ण यह महल रानी पद्मनी द्वारा अपने शील और सतीत्व की रक्षा हेतु आत्मोत्सर्ग की रोमांचक दास्तान का मूक साक्षी है।

सिटी पैलेस, अलवर 

  • सिटी पैलेस (महल) का निर्माण अलवर के 'महाराजा विनय सिंह' ने 1776 ई. में करवाया था। 
  • सिटी पैलेस मूल रूप से भिन्न-भिन्न इमारतों का समूह है। 
  • ये सभी पहाड़ी की तलहटी में स्थित है ओर सागर । 
  • नामक सुन्दर तालाब द्वारा अलग किया हुआ है। 
  • इस महल का चतुष्कोणीय प्रांगण बहुत ही भव्य है । 
  • आकृति के अनुसार यह छतरी के अनुसार है। 
  • ये महल मुगल व राजपूत स्थापत्य शैली का मिश्रण है।

लालगढ़ महल

  • बीकानेर के लालगढ़ महल का निर्माण महाराजा गंगासिंह ने अपने पिता लालसिंह की स्मृति में करवाया था। 
  • यह महल लाल पत्थर से निर्मित व शानदार नक्काशी युक्त है।
  • महल के भीतरी कक्षों में दीवारों पर चित्ताकर्षक चित्रकारी की गई है। 
  • महल में करीब 100 कमरे बने हुए हैं।
  •  वर्तमान में महल में एक पुस्तकालय चल रहा है। 
  • जिसमें प्रामाणिक अभिलेख व अप्राप्य पुस्तकें संग्रहित हैं।

जूनागढ़ महल (डूंगरपुर) 

  • जूनागढ़ महल का निर्माण लगभग 750 वर्ष पहले रावल वीरसिंह देव ने विक्रम संवत् 1339 को धनमाता पहाड़ी की ढलान पर करवाया। था। 
  • यह महल सात मंजिला है। 
  • महल की स्थापत्य कला अद्भुत है। 
  • महल के चौकोर खंभे, छज्जे, बारीक काम वाली जालियाँ राजपूत स्थापत्य का अनुपम उदाहरण है। 
  • महल की मुख्य दीवारें, कंगुर दुर्ग की प्राचीर के समान है। 
  • महल की भितरी दीवारों पर भित्ति चित्रों का अंलकरण के साथ रंगीन काँच का मनोहारी काम भी देखने को मिलता है।

सिलिसेढ़ महल (अलवर) 

  • सिलिसेढ़ महल 'सिलिसेढ़ झील के किनारे पर स्थित है। 
  • यह झील एक अप्राकृतिक झील है। 
  • झील की सुन्दरता से प्रसन्न होकर अलवर 'महाराजा विनय सिंह ने 1844 ई.' में अपनी रानी शिला के लिए इस छ: (6) मंजिले महल का निर्माण करवाया। 
  • वर्तमान में राज्य सरकार ने इस महल को तीन सितारा होटल में परिवर्तित कर दिया है। 
  • यह झील पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र। है। 
  • सिलिसेढ़ झील 'राजस्थान का नंदन कानन' कहलाती है।

'सिसोदिया रानी का महल (जयपुर) 

  • सिसोदिया रानी का महल आगरा-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग नं. ग्यारह (11) पर शहर की चार दीवारी के अंदर पहाड़ी की सुरंग तलहटी के मध्य स्थित है। 
  • इस महल का निर्माण 'सवाई जयसिंह द्वितीय' ने 1728 ई. में अपनी पत्नी 'सिसोदिया रानी चन्द्र कुँवरी
  • (महाराणा अमरसिंह द्वितीय की पुत्री) के लिए करवाया था।
  • इस महल में ही सिसोदिया रानी चंद्रकुँवरी ने माधोसिंह प्रथम को जन्म दिया था। 
  • महल की दीवारों पर बने भित्ति चित्रों में शिकार के दृश्य व राधाकृष्ण के चित्र प्रमुखता से अंकित हैं। 
  • महल के आगे एक विशाल बाग है जिसमें पर्यटन विभाग द्वारा सुन्दर फुलवारी व फव्वारें लगा दिये गये हैं

रूठी रानी का महल (अजमेर) 

  • रूठी रानी का महल अजमेर में 'आनासागर झील' के तट पर स्थित है। 
  • यह रूठी रानी और कोई नहीं बल्कि मुगल सम्राट जहाँगीर की पत्नी 'नूरजहाँ' है जो सम्राट से रूठने के बाद यहाँ पर रही थी। 
  • इस कारण इसे रूठी रानी का महल कहते हैं। 
  • रूठी रानी का एक अन्य महल मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) में भी है जिसका निर्माण जोधपुर के शासक राव मालदेव ने अपनी रानी उमादे के लिए करवाया। 
  • उमादे किसी कारणवश रूठ कर अजमेर स्थित तारागढ़ दुर्ग में आ गई और इस मालदेव द्वारा बनाए गए महल में एक दिन भी नहीं रही अत: इसे रूठी रानी का महल कहते हैं।

बूंदी के महल (बूंदी) 

  • बूंदी के महल बूंदी के दुर्ग में स्थित है। 
  • ये महल अपने निर्माताओं के नाम से प्रसिद्ध हैं । 
  • इन महलों में छत्र महल, अनिरूद्ध महल, रतन महल, बादल महल और फूल महल स्थापत्य कला के अति उत्कृष्ट उदाहरण हैं। 
  • बूंदी के इन राजमहलों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके भीतर अनेक दुर्लभ एवं जीवंत भित्ति चित्रों के रूप में कला का एक अनमोल खजाना विद्यमान है। 
  • विशेषकर 'महाराव उम्मेद सिंह' के शासनकाल में निर्मित चित्रशाला (रंग विलास) बूंदी चित्रशैली का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। 
  • महल के चित्रों में शिकार, युद्ध, रागरागनियों, बारहमासा, प्रकृति चित्रण, नारी सौंदर्य तथा अन्य धार्मिक और लौकिक विषयों से सम्बन्धित चित्रों का बाहुल्य है।

करौली के भव्य राजमहल

  • करौली के राज महल अपनी विशालता और अद्भुत स्थापत्य के लिए विख्यात है। 
  • जिनका निर्माण किसा एक समय में न होकर अलग-अलग महाराजाओं द्वारा करवाया गया। 
  • इन राजमहलों का प्रवेश द्वार विशाल एवं भव्य है। 
  • मेहराबदार झरोखों से युक्त इस विशाल दरवाजे पर किये गये हल्के पीले रंग की आभा सूर्यास्त के समय देखते ही बनती है। 
  • भवन के दोनों ओर छत से सटकर झरोखों का निर्माण किया गया है। 
  • इन झरोखों में बैठकर राजमहल की औरतें राजदरबार की कार्यवाही देखती थी। 
  • राजमहल के अन्य भवनों से घिरा दरबार भवन के ऊपर विशाल बारादरी है। 
  • इस दो मंजिली बारादरी में चित्रित भित्ति चित्रों में रंग व कल्पना का अद्भुत समन्वय है। 
  • ये भवन एवं इसमें निर्मित भित्ति चित्र में राजपूत व मुगल शैली का सामंजस्य है।

अल्बर्ट हॉल (जयपुर) 

  • जयपुर शहर की हृदय स्थली रामनिवास बाग के मध्य स्थित भारतीय व फारसी शैली में बनी यह इमारत शहर का प्रमुख पर्यटक स्थल है। 
  • सवाईरामसिंह के समय इस इमारत का निर्माण प्रारंभ हुआ था तथा 1887 ई. में महाराजा माधोसिंह ने 'प्रिन्स ऑफ अल्बर्ट' के आगमन व सम्मान में निर्मित इस भवन की आधारशिला '6 फरवरी, 1876 ई.'' को प्रिंस अल्बर्ट ने रखी व '21 फरवरी, 1887 ई.' को तत्कालीन भारतीय गवर्नर जनरल के एजेन्ट एडवर्ड ब्रेडफोर्ड ने उद्घाटन किया।

अन्य महत्वपूर्ण महल 

सुख महल [बूंदी]
मोती महल [जोधपुर]
फूल महल [जोधपुर]
हवा बंगला 
स्वरुपनिवास एंव केसर विलास [सिरोही]
बनेड़ा  महल 
फ़तेह प्रकाश महल 
 एक थम्बिया महल 
विजय मंदिर 
अभेड़ा महल 
कदमी महल 
पंचमहला बैराठ [जयपुर]
लक्ष्मी विलास महल 

Rajasthan Ke Mahal PDF 

Name of The Book : *Rajasthan Ke Mahal PDF in Hindi*
Document Format: PDF
Total Pages: 10 
PDF Quality: Normal
PDF Size: 1 MB
Book Credit: Harsh Singh
Price : Free



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