Islam Dhram Ka Itihas in Hindi

Islam Dhram Ka Itihas in Hindi

इस्लाम का उदय  - Islam Dhram Ka Itihas in Hindi

SO, Good Morning Guys....
आज का हमारा टॉपिक है Rise Of Islam यानि इस्लाम का उदय। 
भारतीय इतिहास में मुस्लिमो का योगदान  है क्योंकि इसी के आधार पर भारत में मुस्लिम शासन चलेगा। 
भारत में मुस्लिमों के आने का सबसे बड़ा उद्देशय ही था भारत में मुस्लिम धर्म का प्रचार - प्रसार करना और लूटपाट करना। 
भारत कहलाता था सोने की चिड़िया और हमारे यह मंदिरो में अपार सोना भरा हुआ था और उसी की लूट करने मुस्लिम अक्सर भारत आया करते थे। 


इस्लाम -

इस्लाम एक धर्म है जो इक्तेश्वरवाद धर्म कहलाता है। कहने का मतलब है की इस्लाम में केवल एक ईश्वर को मान्यता दी जाता है जिसे अरबी भाषा में अल्लाह और फ़ारसी में खुदा कहा जाता है। 
इस्लामधर्म में मान्यता है की अल्लाह एक है इसके जैसा और कोई नहीं। यह सर्वोच्च है। 
अगर हम अल्लाह की कल्पना करने की कोशिश भी करेंगे तो नहीं कर पाएंगे। 
जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते उसकी कोई मूर्त नहीं होती। इसलिए अल्लाह की ना तो कोई मूर्त है और ना ही कोई सूरत। 
इसीलिए इस्लाम धर्म में मूर्ति पूजा करना वर्जित है। 

इस्लाम धर्म पांच स्तंभो के आधार पर फॉलो किया जाता है -


और इस्लाम का सबसे पहला स्तंभ है कलमा 
इसका मतलब है -- ला इल्लाह ईल इल्लाह मोहमद रसूल अल्लाह 
इसका मतलब है की अल्लाह एक है इसके जैसा कोई और नहीं। 
मुस्लिमो में मान्यता है की पैगम्बर मोहमद साहब ही अल्लाह का आखरी दूत है और अल्लाह ने ही कुरान नाम  एक पवित्र पुस्तक देकर मोहमद साहब जो धरती पर भेजा है। 
हर व्यक्ति  जो इस बात पर बिन सवाल किय आँख बंद करके विश्वास करेगा वही मुस्लिम होगा और जो इस बात को नहीं मनेगा उसे काफिर या गैर - मुस्लिम कहा जायेगा। 
ऐसा व्यक्ति जो कलमा पर विश्वास करता है वही मुसलमान कहलायेगा। 

दूसरा स्तंभ - एक सच्चा मुसलमान दिन में पांच बार नमाज़ अदा करेगा। 

तीसरा स्तंभ - एक सच्चा मुसलमान रमज़ान के महीने में रोज़ा रखेगा। 

चौथा स्तंभ - एक सच्चा मुसलमान जीवन में कम से कम एक बार हज़ यात्रा करेगा जिसमे वह इस्लाम धर्म के दो पवित्र तीर्थ स्थल मक्का और मदीना की यात्रा करेगा। 

पाँचवां स्तंभ एक सच्चा मुसलमान जीवन में हमेशा ज़कात देगा। 
कहने का मतलब है की एक मुस्लिम एक साल में जितनी भी आमदनी करेगा उसका 1/40 वां भाग दान करेगा और उसका यह दान इतना गुप्त होना चाहिए की बाएं हाथ को भी पता न चले की दाये हाथ ने क्या दान किया।
यानी ज़कात पूर्णयता गुप्त  चाहिए। 
जो व्यक्ति इस्लाम धर्म के इन पांचों स्तंभो का पालन करेगा वही सच्चा मुसलमान है बाकि सारे के सारे काफ़िर हैं। 

इस्लाम धर्म के संस्थापक थे पैगम्बर मोहमद साहब / हज़रत मोहमद साहब। 
हज़रत मोहमद साहब ने इस्लाम धर्म की स्थापना की जिनका जन्म 570 ई. सऊदी अरब के ही एक शहर मक्का में हुआ। 
610 ई. में मोहमद साहब को हिरा नामक गुफा में महाज्ञान की प्राप्ति हुई।  
इस्लाम धर्म में मान्यता है की मोहमद साहब हिरा नाम की गुफ़ा में घंटो - घंटो तक ध्यान मग्न रहते थे। 
एक बार जब मोहमद साहब हीरा गुफ़ा में ही ध्यान लगा रहे थे तो काफ़ी लम्बे समय तक ध्यान लगाते रहे। 
कई दिनों बाद वह इसी हीरा नामक गुफा से बाहर आये तो उनके हाथ में एक किताब थी जिसका नाम था कुरान। 
मोहमद साहब ने लोगो को कहा की अल्लाह ने अपने जिब्राईल नाम के फ़रिश्ते को मेरे पास यह पवित्र पुस्तक क़ुरान देके भेजा है और मुझे बताया की तुम उस अल्लाह के दूत हो और तुम्हे इस पवित्र पुस्तक का पूरी दुनिया में प्रचार करना है। 
हर व्यक्ति  जो इस बात पर बिन सवाल किय आँख बंद करके विश्वास करेगा वही मुस्लिम होगा और जो इस बात को नहीं मनेगा उसे काफिर या गैर - मुस्लिम कहा जायेगा। 

इस्लाम धर्म 610 ई. (7 वीं शताब्दी) में सऊदी अरब के ही एक शहर मक्का से शुरू हुआ। 
  
और इसके बाद हज़रत मोहमद साहब ने अपने उपदेश देने शुरू किए और लोग उन्हें फॉलो करने लगे। 
जैसे - जैसे हज़रत मोहमद साहब की पॉपुलैरिटी बढ़ने लगी तो ईसाइयों और यहूदियों को इन्सेक्युरिटी होने लगी इसी लिए ईसाइयों और यहूदियों ने मोहमद साहब को मक्का से बाहर निकल दिया। 
622 ई. में हज़रत मोहमद साहब मक्का छोड़कर मदीना चले गए। 
हज़रत मोहमद साहब की मक्का से मदीना की यात्रा को इस्लाम धर्म में हजारथ कहा गया। 
और इसी साल इस्लामिक कलैंडर शुरू हुआ जो हिज़री संवत से शुरू होता है।  
इसके बाद हज़रत मोहमद साहब मदीना में ही रहे तथा मदीना में ही रहकर इन्होने इस्लाम धर्म का प्रचार - प्रसार किया। 
632 ई. में सऊदी अरब (मक्का) में ही हज़रत मोहमद साहब की मृत्यु हुई। 
हज़रत मोहमद साहब की मृत्यु के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा की हज़रत मोहमद साहब के बाद इनका उत्तराधिकारी कौन बनेगा ?
हज़रत मोहमद साहब के सबसे पहले अनुयायी थे अली। 
हज़रत मोहमद साहब की मृत्यु के बाद अली ही इनके उत्तराधिकारी बनाने के सबसे पहले दावेदार थे। 
क्योंकि यह हज़रत मोहमद साहब के दामाद थे और सबसे पहले शिष्य भी थे। 
पर हज़रत मोहमद साहब के उत्तरादिकारी अली को न बनाकर इनके ही एक अन्य शिष्य अबू बक्र को बनाया गया। 
Note: हज़रत मोहमद साहब के उताधिकारियों को खलीफा कहा जाता है। 
अली हज़रत मोहमद साहब के चौथे उत्तराधिकारी बने। 
अली के उत्तराधिकारी बनने के बाद मुस्लिमों में विवाद हो गया और मुस्लिम कम्युनिटी दो समुदायों में विभाजित हुई - शिया और सुन्नी। 
शिया - 15-20% लोग जो अली को हज़रत मोहमद साहब का पहला उत्तराधिकारी मानते थे। 
सुन्नी - 80-85% लोग जो अबू बक्र को हज़रत मोहमद साहब का पहला उत्तराधिकारी मानते थे। 
लगभग 200 सालों तक शिया और सुन्नियों में विवाद चलता रहा। 
शिया और सुन्नीयों के मतभेदों को कम करने के लिए ही एक नए मुस्लिम समुदाय सूफी का उद्धगम हुआ। 

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