Vayumandal Ki Parte (Layers of Atmosphere in Hindi) । Physical Geography । sscwill.in

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क्षोभमंडल (Troposphere) :-

➤ यह वायुमंडल की सबसे निचली परत है।

➤ ध्रुवों पर इसकी ऊंचाई 8-10km है तथा भूमध्य रेखा पर इसकी ऊंचाई 15km तक होती है।

➤ समान्यत: इसकी औेस्तन ऊंचाई 8-13 km होती है, मौसम सबंधित सभी घटनाएं जैसे बादल, आंधी, वर्षा, आदि इसी मण्डल में होती है।

➤जब हम भूमि से 165 मीटर ऊपर की ओर जाते हैं तो तापमान 1 डिग्री सेंटीग्रेड गिरता है।

➤अथवा 1 किलोमीटर की ऊंचाई पर तापमान में 6.5 सेंटीग्रेड की गिरावट होती है जिसे लेप्स रेट कहते हैं।
10 मीटर ऊपर जाने से एयर वायु दाब 1MB बड़ता है।

➤ जेट स्ट्रीम का निर्माण क्षोभमंडल में होता है। यह समताप मंडल को क्षोभमंडल से अलग करती है इसकी मोटाई 1.5 km होती है।

➤ क्षोभमंडल को संवहन मंडल भी कहा जाता है, क्योंकि संवहन धाराएं इसी मंडल की सीमा तक सीमित होती हैं।
Note:-  इस मंडल को अधो मंडल भी कहा जाता है।


समतापमंडल (Stratosphere) :- 


➤ समताप मंडल में कोई भी मौसमी घटना जैसे आंधी, बादलों का गर्जन, बिजली का कड़कना, धूल कण एवं जलवाष्प जैसा कुछ नहीं होता इसी कारण यह विमान उड़ाने के लिए सबसे अच्छा स्थान माना जाता है।

➤ ओजोन परत समताप मंडल में पाई जाती है जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है इसलिए इसे पृथ्वी का सुरक्षा कवच कहा जाता है।

➤ 20 से 25 किलोमीटर तक तापमान में कोई परिवर्तन नहीं आता 20 किलोमीटर के बाद तापमान बढ़ता है क्योंकि ओजोन परत ताप पैदा करती है।


➤ ओजोन परत को एक अलग मंडल माना जाता है इसकी ऊंचाई 32 km से 7 km तक होती है।

➤ इस मंडल में ऊंचाई के साथ तापमान बढ़ता जाता है 1 किलोमीटर ऊंचाई पर तापमान में 5 डिग्री सेंटीग्रेड की वृद्धि होती है।

➤ ओजोन परत के ह्रास का कारण CFC गैस है CFC गैस का उपयोग एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर आदि में होता है।

➤ समताप मंडल में इस मान्यता विशेष प्रकार के बादलों का निर्माण होता है जिन्हें मुलाभ मेघ कहते हैं।


मध्यमंडल (Mesosphere) :-



➤ उल्का पिंड समताप मंडल में घर्षण बल के कारण जलना शुरू करते हैं महाराष्ट्र में स्थित टूनले झील का निर्माण उल्का पिंड के गिरने से हुआ था।

 समताप मंडल से 80 किलोमीटर की ऊंचाई तक मध्यमंडल फैला हुआ है यहां भी ऊंचाई के साथ-साथ तापमान गिरता है ।

➤ लगभग 80 किलोमीटर की ऊंचाई पर तापमान -100 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच जाता है।


आयन मंडल (Ionosphere) :-



➤ आयन मंडल मध्य मंडल से 80 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक आयन मंडल फैला हुआ है इसमें विद्युत आवेशित कण पाए जाते हैं जिन्हें आयन कहते हैं।


आयन मंडल में ऊंचाई बढ़ने के साथ-साथ तापमान में वृद्धि होती है।


बाह्यमण्डल (Exosphere) :-



➤ आयन मंडल से ऊपर के भाग को बाह्यमण्डल कहा जाता है इसकी कोई ऊपरी सीमा नहीं होती।

 बाह्यमण्डल में हाइड्रोजन और हीलियम गैस की मात्रा अत्यधिक है।

➤ औरोरा ऑस्टोलिस एवं औरोरा बोरियालिस ब्राह्यमंडल में होने वाली विशेष वायुमंडलीय घटनाएं हैं।

➤ औरोरा का शब्दिक अर्थ होता है प्रात:काल और बोरियालिस का अर्थ होता है उतर एवं दक्षिण। इसी कारण इन्हें उतरी ध्रुव प्रकाश एवं दक्षिणी ध्रुव प्रकाश कहते हैं।

➤ वास्तव में अरोरा ब्रह्मांडी चमकते प्रकाश होते हैं जिनका निर्माण चुंबकीय तूफान के कारण सूर्य की सतह से विसर्जित इलेक्ट्रॉन तरंग के कारण होता है।

➤ औरोरा ध्रुवीय अकाश में लटके विचित्र बहुरंगी आतिशबाजी की तरह दिखाई पड़ते हैं यह प्राय आधी रात के समय दृष्टिगत होते हैं।


➤ आकाश का रंग नीला प्रकीर्णन की वजह से होता है अंतरिक्ष यात्रियों को अकाश काला दिखाई पड़ता है।



:-: वायुदाब को पास कर और मिली बार में मापा जाता है-

1 वायुमंडलीय दाब - 1013.35mb
1 वायु दाब - 1013.25 kg Pascal
1 वायु दाब - 760mm/hg यां 76cm
समान वायुदाब को मिलाने वाली रेखा को समदाब रेखा कहते हैं।
वायुदाब को बैरोमीटर से मापा जाता है
:- पारे का तेजी से गिरना - आंधी
:- पारे का अचानक गिरना तथा धीरे-धीरे बढ़ना - वर्षा
:- पारे का बढ़ते रहना साफ मौसम दिखाता है।

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